राजनीति

इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: 8 जून की मीटिंग में शामिल नहीं होगी DMK, ममता बनर्जी दिखाएंगी ताकत

इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: 8 जून की मीटिंग में शामिल नहीं होगी DMK, ममता बनर्जी दिखाएंगी ताकत

​नई दिल्ली/चेन्नई। आगामी 8 जून को देश की राजधानी में विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कोलकाता से दिल्ली आ रहे हैं। लेकिन, इस बार की बैठक से पहले विपक्षी खेमे को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस पार्टी का एक बेहद पुराना और सबसे मजबूत दक्षिणी सहयोगी दल—द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)—इस बैठक का हिस्सा नहीं होगा।

​तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में बदले राजनीतिक समीकरणों और कांग्रेस के एक अप्रत्याशित फैसले के कारण डीएमके ने खुद को इस विपक्षी गठबंधन से दूर कर लिया है।

​क्यों नाराज हुई DMK? एक्टर विजय की पार्टी ‘TVK’ से कांग्रेस का गठबंधन बनी वजह

​राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के ठीक बाद कांग्रेस पार्टी ने राज्य की सत्ता में शामिल होने के लिए दिग्गज तमिल अभिनेता विजय की नई नवेली पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का दामन थाम लिया है। कांग्रेस का यह कदम डीएमके को सीधे तौर पर नागवार गुजरा है।

​राहुल गांधी और विजय का पुराना किस्सा: राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि अभिनेता विजय एक वक्त कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे, लेकिन तब राहुल गांधी ने उन्हें पहले एनएसयूआई (NSUI) ज्वाइन करने की सलाह दी थी। हालांकि, राजनीतिक मजबूरियों और तमिलनाडु के नए घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी ने चुनाव बीतते ही विजय की पार्टी टीवीके को अपना खुला समर्थन दे दिया।

​पर्दे के पीछे की कहानी: राहुल गांधी को किसने दी थी DMK से नाता तोड़ने की सलाह?

​सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु चुनाव से पहले ही कांग्रेस के आंतरिक सर्वे और रणनीति में बदलाव की मांग उठने लगी थी। मूल रूप से तमिलनाडु के ही रहने वाले कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने सबसे पहले राहुल गांधी को यह सुझाव दिया था कि कांग्रेस को डीएमके (DMK) से अपना पुराना नाता तोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

​हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम किसी नई और अनपेक्षित पार्टी के साथ जाने के पक्ष में नहीं थे। इसी दबाव के चलते राहुल गांधी ने चुनाव तो डीएमके के साथ मिलकर ही लड़ा, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर आखिरी समय तक दोनों दलों में भारी खींचतान (चिकचिक) चलती रही।

​डीएमके ने कांग्रेस को महज 28 सीटें दी थीं।

​साथ ही भविष्य में एक राज्यसभा सीट देने का भी वादा किया था।

​इस रवैये से राहुल गांधी बेहद नाखुश थे। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ एक भी साझा रैली नहीं की। चुनाव परिणाम आते ही कांग्रेस ने तुरंत पासा पलटा और स्टालिन का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ सरकार बना ली।

​संसद में अब न सत्ता पक्ष, न विपक्ष: अलग बैठेगी DMK

​कांग्रेस के इस कदम को डीएमके ने अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा माना और बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और राज्यसभा के सभापति (चेयरमैन) को लिखित में चिट्ठी भेजकर मांग की थी कि उन्हें संसद में विपक्ष की तय सीटों से अलग बैठने के लिए जगह (सीटें) आवंटित की जाए। अब संसद सचिवालय ने उनकी इस मांग को मंजूर कर लिया है।

​वर्तमान में संसद में डीएमके का संख्या बल काफी मजबूत है:

​लोकसभा में: 22 सांसद

​राज्यसभा में: 8 सांसद

​समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद डीएमके लोकसभा में कांग्रेस की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी थी। लेकिन अब डीएमके के सभी 30 सांसद संसद में न तो सत्ता पक्ष (NDA) की बेंचों पर बैठेंगे और न ही विपक्ष (INDIA) के साथ। वे एक स्वतंत्र गुट के रूप में बीच में बैठेंगे।

​क्या वाजपेयी दौर की तरह बीजेपी के करीब जा रही है DMK?

​डीएमके का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि वह पहले भी केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान एनडीए (NDA) का हिस्सा रह चुकी है और उसके नेता केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष के एक करीबी नेता ने बताया कि वे अभी भी चाहते हैं कि डीएमके 8 जून की बैठक में आए, क्योंकि स्टालिन ने अभी तक औपचारिक रूप से एनडीए में जाने का एलान नहीं किया है।

​लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब संसद में राष्ट्रीय मुद्दों के आधार पर डीएमके से समर्थन मांग रही है, और कांग्रेस को आंख दिखाने के लिए डीएमके भी इस सहयोग के लिए राजी होती दिख रही है। उदाहरण के तौर पर, केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में जो परिसीमन बिल (Delimitation Bill) लाने जा रही है, रिपोर्ट के मुताबिक डीएमके ने उसके समर्थन के लिए हामी भर दी है। यह संकेत देता है कि बीजेपी और डीएमके के बीच परदे के पीछे एक नया वैचारिक रिश्ता आकार ले रहा है।

​8 जून की बैठक की सबसे बड़ी हाईलाइट

​अब देखना यह दिलचस्प होगा कि दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की इस बैठक में तमिलनाडु से अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ का कोई प्रतिनिधि शामिल होता है या नहीं। बहरहाल, 8 जून की इस रणनीतिक बैठक की सबसे बड़ी हेडलाइन डीएमके की अनुपस्थिति और विपक्ष में अपनी धमक साबित करने आ रहीं ममता बनर्जी की उपस्थिति ही रहने वाली है।

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