‘मिडिल ईस्ट युद्ध में हार के बाद ईरानियों में फूट डाल रहे अमेरिका-इजरायल’: मोजतबा खामेनेई
‘मिडिल ईस्ट युद्ध में हार के बाद ईरानियों में फूट डाल रहे अमेरिका-इजरायल’: मोजतबा खामेनेई
तेहरान: ईरान के नव-निर्वाचित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दोनों देशों पर आरोप लगाया है कि मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) युद्ध में निर्णायक हार का सामना करने के बाद, अब वे ईरान की जनता के बीच फूट डालने और अविश्वास पैदा करने की गहरी साजिश रच रहे हैं।
ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की 37वीं बरसी के मौके पर मोजतबा खामेनेई का यह कड़ा लिखित संदेश सामने आया है।
”जनता के बीच संदेह और डर के बीज बो रहा दुश्मन”
मोजतबा खामेनेई द्वारा जारी लिखित संदेश को खुमैनी के मकबरे पर एक मौलवी द्वारा पढ़कर सुनाया गया। अपने संदेश में सर्वोच्च नेता ने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा:
”दुष्ट शत्रु जनता के बीच संदेह, निराशा, भय, अविश्वास और फूट के बीज बोने की कोशिश कर रहा है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, सभी देशवासियों को दृढ़ता, दूरदर्शिता, एकता और सामंजस्य बनाए रखते हुए दुश्मन की नापाक साजिशों को नाकाम करना होगा।”
बरसी समारोह में खाली रही दिवंगत अली खामेनेई की कुर्सी
ईरान के इतिहास में 4 जून का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1989 से हर साल इसी दिन पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई इस स्मृति समारोह में भाषण दिया करते थे। हालांकि, इस वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी।
समारोह स्थल से लाइव प्रसारित फुटेज के अनुसार, इस साल समाधि पर अली खामेनेई के सम्मान में उनकी तस्वीर के साथ एक खाली कुर्सी रखी गई थी, जो वहां मौजूद लोगों के लिए एक भावुक क्षण था।
भूमिगत रहकर कमान संभाल रहे हैं मोजतबा खामेनेई
अपने पिता की हत्या के बाद मार्च में ईरान के तीसरे सर्वोच्च नेता चुने गए मोजतबा खामेनेई ने अब तक पूरी तरह से सार्वजनिक दूरी बनाई हुई है। पद संभालने के बाद से वे एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं और केवल लिखित बयानों के माध्यम से ही ईरानियों को संबोधित कर रहे हैं।
दक्षिणी तेहरान स्थित समाधि पर मोजतबा खामेनेई और उनके पूर्ववर्ती दोनों सर्वोच्च नेताओं (रुहोल्लाह खुमैनी और अली खामेनेई) की बड़ी तस्वीरें लगाई गई थीं। समारोह में शामिल भारी भीड़ ने इस्लामी गणराज्य के झंडों के साथ-साथ ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिज्बुल्लाह के बैनर भी लहराए।
युद्धविराम के बाद भी शांति समझौता अधर में
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में चला लंबा संघर्ष इस साल 8 अप्रैल को एक युद्धविराम समझौते के साथ थमा था। इसके बाद से ही स्थायी शांति समाधान के लिए प्रत्यक्ष और मध्यस्थों के जरिए लगातार वार्ताएं की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।
ईरान की कड़ी शर्त:
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के साथ किसी भी समझौते पर तभी हस्ताक्षर करेगा, जब लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में शत्रुता और सैन्य कार्रवाइयों पर व्यापक रूप से पूर्ण विराम लगेगा। लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह लगातार इजरायल के खिलाफ मोर्चे पर डटा हुआ है।
