Thursday, September 10, 2026
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बंगाल में सियासी कोहराम: विधानसभा के बाद अब संसद में भी TMC में बड़ी टूट की सुगबुगाहट, BJP के संपर्क में 20 सांसद!

बंगाल में सियासी कोहराम: विधानसभा के बाद अब संसद में भी TMC में बड़ी टूट की सुगबुगाहट, BJP के संपर्क में 20 सांसद!

​कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संकट गहराता ही जा रहा है। राज्य स्तर पर पार्टी में हुए ऐतिहासिक बिखराव के बाद अब ममता बनर्जी के लिए दिल्ली (संसद) से भी बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि विधानसभा में 60 विधायकों की बगावत के बाद, अब टीएमसी के 20 सांसद भी पाला बदलने की तैयारी में हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बने हुए हैं।

​यदि यह दावा हकीकत में बदलता है, तो यह न केवल ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा राष्ट्रीय झटका होगा, बल्कि संसद के भीतर पूरे विपक्ष (INDIA ब्लॉक) की कमर तोड़ देगा।

​संसद में टीएमसी की ताकत और टूट का गणित

​वर्तमान में संसद के दोनों सदनों को मिलाकर तृणमूल कांग्रेस के पास कुल 41 सांसद हैं:

​लोकसभा: 28 सांसद

​राज्यसभा: 13 सांसद

​संसद में कांग्रेस के बाद ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Bloc) गठबंधन में टीएमसी दूसरा सबसे बड़ा विपक्षी दल है। सूत्रों के मुताबिक, बगावत का मन बना रहे इन 20 सांसदों की भाजपा के उच्च स्तर पर लगातार गुप्त बैठकें और चर्चाएं चल रही हैं। सांसदों के इस धड़े ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने की स्पष्ट इच्छा जताई है। आने वाले दिनों में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों से और भी चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।

​विधानसभा में पहले ही हो चुका है ‘खेला’: ऋतब्रत बने नेता प्रतिपक्ष

​संसद में मचे इस घमासान के बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी को पहले ही आधिकारिक रूप से विभाजन का सामना करना पड़ा है:

​60 बागी विधायकों ने लामबंद होकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया है।

​विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LOP) के तौर पर आधिकारिक मंजूरी भी दे दी है।

​इसके साथ ही इस बागी गुट ने खुद को ‘असली तृणमूल’ बताते हुए पार्टी पर अपना दावा ठोंक दिया है।

​बगावत की मुख्य वजहें: पार्टी सूत्रों और विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष उबल रहा था। टीएमसी का एक बड़ा धड़ा राज्य में हुए भ्रष्टाचार और आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर केस से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर ममता बनर्जी और सरकार के रवैये से बेहद खफा था। बगावत की पटकथा पिछले हफ्ते ही लिख गई थी, जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की एक महत्वपूर्ण बैठक में टीएमसी के कई बागी विधायक पहुंच गए थे।

​नाम और सिंबल बचाने की जंग: ‘महाराष्ट्र’ जैसी स्थिति का डर

​लगातार लग रहे इन सियासी झटकों ने ममता बनर्जी को चौतरफा दबाव में ला दिया है:

​जनाधार खिसकना: डेढ़ दशक बाद राज्य की सत्ता हाथ से चली गई।

​पार्टी में बड़ी टूट: विधानसभा में बहुमत से ज्यादा (60) विधायक बागी हो गए और फिरहाद हकीम जैसे कद्दावर व बेहद वफादार नेता का इस्तीफा हो गया।

​वजूद का संकट: नेता प्रतिपक्ष का पद हाथ से निकल चुका है।

​अब ममता बनर्जी का पूरा ध्यान किसी भी तरह पार्टी का नाम (All India Trinamool Congress) और उसका आधिकारिक चुनाव चिह्न (जोड़ा फूल) बचाने पर टिक गया है। हालांकि, देश की हालिया राजनीति और महाराष्ट्र (शिवसेना और एनसीपी विवाद) के घटनाक्रमों को देखते हुए यह लड़ाई कानूनी और तकनीकी रूप से ममता बनर्जी के लिए बेहद कठिन होने वाली है। ‘दीदी’ इस समय अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं और पार्टी पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए हर संभव संघर्ष कर रही हैं।

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