बंगाल में सियासी घमासान: अभिषेक बनर्जी पर हमला, अस्पताल के बुलेटिन से बढ़ा सस्पेंस; ममता बनर्जी बोलीं- ‘इलाज के लिए भी BJP की इजाजत चाहिए?’
बंगाल में सियासी घमासान: अभिषेक बनर्जी पर हमला, अस्पताल के बुलेटिन से बढ़ा सस्पेंस; ममता बनर्जी बोलीं- ‘इलाज के लिए भी BJP की इजाजत चाहिए?’
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में शनिवार शाम को हुई एक घटना ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। टीएमसी (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे, जहां स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की और उन पर पत्थर व अंडे फेंके। तृणमूल कांग्रेस ने इसे एक गहरी साजिश करार देते हुए सीधे तौर पर बीजेपी (BJP) पर हमले का आरोप लगाया है, जिस पर भाजपा ने भी ‘अहंकार’ का हवाला देते हुए पलटवार किया है।
अब यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि टीएमसी ने पुलिस प्रशासन और अस्पताल की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे एक बड़ा राजनीतिक ड्रामा शुरू हो गया है।
’अस्पताल पर बनाया गया दबाव, सबूतों के साथ करेंगे खुलासा’
टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने इस मामले में पुलिस प्रशासन पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पुलिस जानबूझकर इस हमले की गंभीरता को छिपाने या कम आंकने की कोशिश कर रही है।
मीडिया से बातचीत में कुणाल घोष ने कहा:
”इस हमले में अभिषेक बनर्जी बुरी तरह घायल हुए हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन पुलिस प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन पर भारी दबाव डाला ताकि चोटों को मामूली दिखाया जा सके। जब अभिषेक को अस्पताल लाया गया, तब वहां सुरक्षा के लिए न तो स्थानीय पुलिस थी और न ही कोई केंद्रीय बल। उन्हें सीधे आईसीयू (ICU) ले जाया गया, लेकिन तभी अस्पताल को ‘ऊपर’ से निर्देश मिलने शुरू हो गए। हम बहुत जल्द पुख्ता सबूतों के साथ देश के सामने रखेंगे कि हमलावर बीजेपी के ही कार्यकर्ता थे।”
अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन से बढ़ा सस्पेंस
एक तरफ जहां टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को गंभीर चोटें आने और उन्हें आईसीयू में भर्ती करने का दावा कर रहे हैं, वहीं कोलकाता के बेले व्यू अस्पताल (Bellevue Hospital) द्वारा जारी आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन ने मामले में नया मोड़ ला दिया है।
अस्पताल ने अपने बयान में कहा:
चोट की स्थिति: छाती पर कुछ मामूली खरोंच के अलावा, शरीर पर चोट का कोई गंभीर या चिंताजनक शारीरिक संकेत नहीं मिला है।
स्वास्थ्य स्थिति: मरीज पूरी तरह से होश में है, सामान्य रूप से बातचीत कर रहा है और खतरे से बाहर है।
अस्पताल में भर्ती: मेडिकल जांच के नतीजों के आधार पर, मरीज को अस्पताल में भर्ती रखने की कोई आवश्यकता (No clinical need for admission) नहीं है।
अस्पताल पहुंचीं ममता बनर्जी, पुलिस और बीजेपी पर साधा निशाना
अस्पताल के इस बुलेटिन और पुलिस की भूमिका से नाराज होकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद बेले व्यू अस्पताल पहुंच गईं और वहां से मोर्चा संभाला। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन को डराया-धमकाया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
”सत्ता के नशे में चूर लोग अस्पतालों और वरिष्ठ अधिकारियों को धमका रहे हैं कि वे अभिषेक बनर्जी को भर्ती न करें। जब मैं खुद अस्पताल के प्रशासक के साथ बैठी थी, तो उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें पुलिस से लगातार धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। डॉक्टर बेहद दुखी हैं, लेकिन उन पर भारी राजनीतिक दबाव है। क्या अब इस देश में किसी के इलाज के लिए भी बीजेपी की इजाजत लेनी होगी? मेरे सामने पुलिस अधिकारियों द्वारा अस्पताल वालों को धमकाया जा रहा था। यह पूरी तरह से अमानवीय और तानाशाही का चरम है।”
