‘विकसित भारत 2047’ की आधारशिला है उच्च शिक्षा: देहरादून में बोले सीएम पुष्कर सिंह धामी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बताया ऐतिहासिक पहल
‘विकसित भारत 2047’ की आधारशिला है उच्च शिक्षा: देहरादून में बोले सीएम पुष्कर सिंह धामी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बताया ऐतिहासिक पहल
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार (30 मई 2026) को शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी को संबोधित किया। “विकसित भारत 2047 के निर्माण में उच्च शिक्षा का महत्त्व” विषय पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान हासिल करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश में शिक्षा, नवाचार (Innovation), अनुसंधान (Research) और कौशल विकास (Skill Development) के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव आए हैं, जो साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) पर विशेष जोर दिया:
सर्वांगीण विकास: उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा प्रणाली के प्राचीन गौरव को वापस लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक कौशल और नवाचार को बढ़ावा देकर उन्हें भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है।
उत्कृष्टता के केंद्र: सीएम ने आह्वान किया कि उच्च शिक्षण संस्थानों को अब केवल पारंपरिक शिक्षण केंद्र बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक उत्कृष्टता केंद्रों (Centers of Excellence) के रूप में खुद को विकसित करना होगा।
डिजिटल लर्निंग और आधुनिक विषयों पर उत्तराखंड सरकार का जोर
देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध शैक्षिक और आध्यात्मिक परंपरा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मूल्य-आधारित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है:
आधुनिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा: राज्य के शिक्षण संस्थानों में अब स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लाइब्रेरी के विस्तार के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और डेटा साइंस जैसे न्यू-एज और आधुनिक विषयों की पढ़ाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज: उन्होंने विशेष रूप से दून विश्वविद्यालय में स्थापित ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और रिसर्च को एक नई और वैज्ञानिक दिशा देगा।
रोजगार सृजक (Job Creators) बनेंगे युवा: सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला (Job Seekers) बनाना नहीं, बल्कि उन्हें एंटरप्रेन्योर और रोजगार सृजित करने वाला (Job Creators) बनाना है। इसके लिए उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय, इंटर्नशिप और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटरों को प्रमोट किया जा रहा है।
कार्यक्रम में जुटे देश-प्रदेश के दिग्गज
इस गरिमामयी विचार गोष्ठी के अवसर पर शिक्षा जगत और राजनीति से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
नितिन नबीन (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी), महेंद्र भट्ट, डॉ. धन सिंह रावत, सुनील कुमार, अजय कुमार और विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति, जाने-माने शिक्षाविद और विशेषज्ञ।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षाविदों और प्रबुद्धजनों से अपील की कि वे अपने ज्ञान, अनुभव और शोध के माध्यम से देश को ‘विकसित भारत 2047’ के महान संकल्प तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाएं।
