Saturday, June 13, 2026
उत्तराखंड

गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारी की नियुक्ति पर रार: रावल भीमाशंकर लिंग के विरोध के बीच ईश्वर लिंग ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारी की नियुक्ति पर रार: रावल भीमाशंकर लिंग के विरोध के बीच ईश्वर लिंग ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

​रुद्रप्रयाग/ऊखीमठ: केदारनाथ अधिष्ठान के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में नए पुजारी की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा इस नियुक्ति पर सवाल उठाने और इसे परंपराओं के खिलाफ बताने के बाद, अब नवनियुक्त पुजारी ईश्वर लिंग ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के सामने अपना पक्ष रखा है।

​ईश्वर लिंग ने बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) को एक पत्र भेजकर अपनी नियुक्ति को पूरी तरह वैध बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी नियुक्ति रद्द की गई, तो वह अपने परिवार के साथ ऊखीमठ मंदिर परिसर में आमरण अनशन पर बैठेंगे।

​रावल के दीक्षित शिष्य होने का दावा

​ईश्वर लिंग ने अपने पत्र में एक बड़ा दावा करते हुए खुद को केदारनाथ के मुख्य रावल का ही शिष्य बताया है। पत्र के अनुसार:

​दीक्षा की तारीख: उनका दावा है कि 1 मई 2015 को ऊखीमठ मंदिर परिसर में आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान स्वयं रावल केदारनाथ श्री श्री श्री 1008 जगद्गुरु भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य महास्वामी ने उन्हें विधिवत रूप से अपना दीक्षित शिष्य बनाया था।

​पुराना अनुभव: वह लंबे समय से मंदिर व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। 12 अक्टूबर 2016 को मंदिर समिति ने उन्हें 9,500 रुपये मासिक वेतन पर ‘वीरेश्वर पुजारी’ के पद पर नियुक्त किया था। इसके बाद उन्होंने गुप्तकाशी और ऊखीमठ के मंदिरों में सेवाएं दीं और कोरोना महामारी के दौरान भी धार्मिक कार्यों का संचालन किया।

​कोर्ट के आदेश और मंदिर समिति के प्रस्ताव से मिली नियुक्ति

​ईश्वर लिंग ने पत्र में स्पष्ट किया कि उनकी यह नियुक्ति किसी चोर दरवाजे से नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है:

​लोक सेवा अभिकरण का रुख: लंबे समय तक स्थायी नियुक्ति न मिलने पर उन्होंने लोक सेवा अभिकरण में एक क्लेम पिटीशन दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को मामले के निस्तारण के निर्देश दिए थे।

​समिति की मुहर: कोर्ट के आदेश के बाद 10 मार्च 2026 को बीकेटीसी की बैठक में सर्वसम्मति से उनकी नियुक्ति का प्रस्ताव पारित हुआ और इसी आधार पर 25 मई 2026 को उन्हें पुजारी पद का नियुक्ति पत्र मिला।

​कार्यभार ग्रहण: उन्होंने 26 मई को कार्यभार संभाला और 27 मई 2026 से गुप्तकाशी मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना शुरू कर दी।

​पूर्व की नियुक्तियों पर उठाए सवाल, भाई-भतीजावाद का आरोप

​अपने बचाव के साथ-साथ ईश्वर लिंग ने मंदिर समिति की पिछली कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में पुजारियों, वीरेश्वर पुजारियों और अन्य सेवकों की नियुक्तियों में नियमों और परंपराओं की जमकर अनदेखी की गई। कुछ विशेष लोगों और निकट संबंधियों को फायदा पहुंचाने के लिए अयोग्य लोगों को रखा गया, जिससे योग्य लोगों के अधिकारों का हनन हुआ।

​PM, CM और गृह मंत्री तक पहुंचा मामला

​नियुक्ति को रद्द करने की उठ रही मांगों से नाराज ईश्वर लिंग ने इस मामले की गूंज दिल्ली और देहरादून तक पहुंचा दी है। उन्होंने अपने इस पत्र की प्रतिलिपि (Copy) देश के शीर्ष नेतृत्व और मंत्रियों को भेजी है, जिनमें शामिल हैं:

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

​केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

​उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

​धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज

​ईश्वर लिंग का कहना है कि कुछ लोग दुर्भावना के तहत उनकी वैध नियुक्ति को निरस्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। फिलहाल, रावल और पुजारी के बीच छिड़ी इस ‘जंग’ पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के आला अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है और कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

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