गाजा के बच्चों पर युद्ध का गहरा आघात: बमबारी और अपनों को खोने के सदमे से ‘खामोश’ हुए मासूम, मानसिक विकास पर पड़ा बुरा असर
गाजा के बच्चों पर युद्ध का गहरा आघात: बमबारी और अपनों को खोने के सदमे से ‘खामोश’ हुए मासूम, मानसिक विकास पर पड़ा बुरा असर
गाजा पट्टी में चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष के बीच एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मानवीय संकट सामने आया है। कभी हंसमुख और बातूनी रहने वाले गाजा के मासूम बच्चों ने अब पूरी तरह से बोलना बंद कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संस्था ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (MSF) के अनुसार, गाजा के 10 लाख से अधिक बच्चों पर इस युद्ध का इतना गहरा मनोवैज्ञानिक आघात (Trauma) लगा है कि उनकी जुबान ही बंद हो गई है।
एमएसएफ से जुड़ीं बाल मनोचिकित्सक कैट्रिन ग्लिट्ज ब्रुबाक के अनुसार, गाजा में ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो पूरी तरह खामोश हो चुके हैं। यह कोई सामान्य चुप्पी नहीं है, बल्कि लगातार होने वाली बमबारी, अपनों को खोने और बेघर होने के गहरे सदमे का नतीजा है।
क्यों खामोश हो रहे हैं बच्चे? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
मनोवैज्ञानिकों और डॉक्टरों के अनुसार, लगातार बने रहने वाले इस अत्यधिक तनाव का बच्चों के दिमाग पर शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद घातक असर पड़ रहा है:
नर्वस सिस्टम का बैठ जाना: जब कोई बच्चा लंबे समय तक अत्यधिक तनाव, अनिश्चितता और मौत के साए में जीता है, तो उसका नर्वस सिस्टम (Nervous System) जवाब दे देता है। इस भयानक स्थिति से खुद को बचाने के लिए बच्चों का दिमाग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है, जिसके कारण वे बोलना बंद कर देते हैं।
दिमाग की संरचना में बदलाव: डॉक्टरों के मुताबिक, अत्यधिक डर और सदमे के कारण बच्चों के दिमाग का अमिगडाला (Amygdala)— जो तीव्र भावनाओं और डर को संभालता है— बड़ा हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, सोचने-समझने, निर्णय लेने और सामाजिक व्यवहार को नियंत्रित करने वाला दिमाग का हिस्सा कमजोर पड़ जाता है। इसके कारण बच्चों का मानसिक व बौद्धिक विकास पूरी तरह रुक जाता है।
दिल दहला देने वाली दास्तान: पिता की मौत के बाद 5 साल के एडम ने साधी चुप्पी
गाजा के मौजूदा हालातों के बीच 5 साल के मासूम एडम की कहानी इस त्रासदी को बयां करती है। युद्ध से पहले एडम बेहद खुशमिजाज और बातूनी बच्चा था, लेकिन बमबारी के बाद उसके हंसते-खेलते परिवार को टेंट में रहने पर मजबूर होना पड़ा।
एक दिन अचानक हुए हवाई हमले में एडम और उसके पिता दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल के फर्श पर बुनियादी इलाज का इंतजार करते हुए, एडम ने अपनी आंखों के सामने अपने पिता को तड़प-तड़प कर दम तोड़ते देखा। इस भयानक हादसे ने मासूम के दिलो-दिमाग पर ऐसा असर किया कि उसने पूरी तरह बोलना बंद कर दिया। इतना ही नहीं, एडम ने खाना-पीना भी लगभग छोड़ दिया है और वह एक गहरे सदमे में है।
शारीरिक और ‘अदृश्य घावों’ से जूझ रही नई पीढ़ी
गाजा के अस्पतालों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, बच्चे न सिर्फ मानसिक बल्कि भयानक शारीरिक दर्द भी झेल रहे हैं:
मासूमों का झुलसना: बमबारी की चपेट में आने से 4 से 6 साल के बच्चे सबसे ज्यादा झुलस रहे हैं, क्योंकि हमलों के वक्त वे बड़ों की तरह तेजी से भागकर खुद को सुरक्षित नहीं कर पाते।
बुनियादी सुविधाओं की कमी: अस्पतालों में दवाओं, बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं और सही पोषण की भारी कमी के कारण बच्चों के शारीरिक घाव बहुत देरी से भर रहे हैं।
चिकित्सकों का मानना है कि दवाओं से शारीरिक घाव तो देर-सबेर ठीक हो जाएंगे, लेकिन गाजा की इस पूरी पीढ़ी के मन पर लगे ये ‘अदृश्य घाव’ (Psychological Scars) ताउम्र उनके साथ रह सकते हैं।
