गुजरात के गिर में ‘बेबेसिया’ का कहर: 4 शेर के शावकों की मौत, संक्रमण रोकने के लिए 10 किमी के दायरे में शेरों को किया जा रहा आइसोलेट
गुजरात के गिर में ‘बेबेसिया’ का कहर: 4 शेर के शावकों की मौत, संक्रमण रोकने के लिए 10 किमी के दायरे में शेरों को किया जा रहा आइसोलेट
गांधीनगर: एशियाई शेरों (Asiatic Lions) के एकमात्र घर गुजरात के गिर जंगल से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। गिर के जंगलों में इन दिनों एक बेहद खतरनाक परजीवी (पैरासाइट) संक्रमण फैला हुआ है, जो शेरों के छोटे बच्चों (शावकों) के लिए काल बन रहा है। इस जानलेवा संदिग्ध संक्रमण का नाम ‘बेबेसिया’ (Babesia) है। इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए गुजरात सरकार और वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या है ‘बेबेसिया’ और यह कैसे लेता है जान?
वन मंत्रालय और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बेबेसिया वास्तव में एक ऐसा संक्रमण है जो टिक्स (Ticks – मवेशियों और जंगली जानवरों के शरीर पर चिपकने वाले छोटे खून चूसने वाले कीड़े/परजीवी) के काटने से फैलता है।
खून की भारी कमी: यह परजीवी शेरों की खाल से चिपक जाता है और धीरे-धीरे उनके शरीर का सारा खून चूस लेता है।
शावकों पर सीधा असर: बड़े शेरों की तुलना में छोटे शावकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम होती है, जिसके कारण वे इस जानलेवा एनीमिया (खून की कमी) और संक्रमण का सामना नहीं कर पा रहे हैं और उनकी मौत हो रही है।
4 शावकों की मौत के बाद एक्शन में सरकार, 17 आइसोलेट
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस संकट की पुष्टि करते हुए बताया कि इस संदिग्ध संक्रमण के कारण अब तक चार शेर के शावकों की मौत हो चुकी है। बीमारी को आगे फैलने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाते हुए 17 अन्य शावकों को रेस्क्यू कर आइसोलेशन में (अलग) रखा गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
प्रभावित इलाकों में 10 किलोमीटर का ‘बफर जोन’
गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने इस संकट से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी साझा की:
शेरों की घेराबंदी (Isolate): गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों के जिन हिस्सों में यह संक्रमण पाया गया है, वहां के 10 किलोमीटर के दायरे को चिन्हित कर शेरों को आइसोलेट किया जा रहा है, ताकि संक्रमित जानवर अन्य स्वस्थ शेरों के संपर्क में न आ सकें।
सैंपल्स की जांच: मृत पाए गए शावकों के विसरा और खून के नमूने (Samples) गहन जांच के लिए लैब भेजे गए हैं और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की टीम तैनात: जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज (पशु चिकित्सा महाविद्यालय) के विशेषज्ञ डॉक्टर, वन्यजीव वैज्ञानिक और वन विभाग के फ्रंटलाइन वर्कर्स चौबीसों घंटे फील्ड में तैनात हैं।
अल्ट्रा-क्लीनिंग अभियान: गिर अभयारण्य (Gir Sanctuary) के भीतर और उसके आसपास के गांवों के मवेशियों से टिक्स (किलनी/परजीवी) को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक विशेष छिड़काव और एंटी-टिक अभियान चलाया जा रहा है।
वन विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शेरों के कुनबे को सुरक्षित रखने के लिए हर मुमकिन एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।
