सावधान: DigiLocker और CISCE के नाम पर चल रही है फर्जी वेबसाइट, चुराई जा रही है OTP समेत आपकी निजी जानकारियां; (MeitY) ने जारी की चेतावनी
सावधान: DigiLocker और CISCE के नाम पर चल रही है फर्जी वेबसाइट, चुराई जा रही है OTP समेत आपकी निजी जानकारियां; (MeitY) ने जारी की चेतावनी
डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां एक तरफ सरकारी सुविधाएं ऑनलाइन आसान हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर ठग (स्कैमर्स) भी सक्रिय हो गए हैं। हाल ही में केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फर्जी वेबसाइटों के जरिए होने वाले बड़े फ्रॉड को लेकर एक गंभीर चेतावनी (एडवाइजरी) जारी की है।
स्कैमर्स अब शिक्षण संस्थानों और डिजिटल डॉक्यूमेंट्स के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले DigiLocker जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म्स की हूबहू नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
इस फर्जी URL से रहें सावधान: चुराई जा रही है गुप्त जानकारियां
एक्स (X – पूर्व में ट्विटर) पर ‘डिजिटल इंडिया’ के आधिकारिक हैंडल से जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार, साइबर अपराधियों द्वारा विशेष रूप से छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाने के लिए एक फर्जी वेबसाइट तैयार की गई है:
फर्जी वेबसाइट का URL: digilocker.cisceboard.org
कैसे करती है ठगी: यह नकली पोर्टल देखने में बिल्कुल असली डिजिलॉकर की तरह डिजाइन किया गया है। जब कोई यूजर इस पर जाता है, तो यह वेबसाइट उनकी निजी जानकारियां जैसे—पहचान पत्र (ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी), ई-मेल आईडी, फोन नंबर और सबसे संवेदनशील जानकारी यानी OTP (वन टाइम पासवर्ड) चुरा लेती है। इसके बाद स्कैमर्स इन जानकारियों का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) के लिए करते हैं।
टेक-सेवी नहीं हैं? फिर भी इन 5 आसान तरीकों से पहचानें असली और नकली वेबसाइट
स्कैमर्स आजकल इतनी सफाई से वेबसाइट की नकल करते हैं कि पहली नजर में किसी के लिए भी अंतर कर पाना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन इन बेसिक बातों का ध्यान रखकर आप धोखाधड़ी से बच सकते हैं:
URL (वेबसाइट के पते) को ध्यान से देखें: किसी भी वेबसाइट पर अपनी जानकारी डालने से पहले उसके यूआरएल की अच्छे से जांच करें। हैकर्स हमेशा असली नाम से मिलता-जुलता (जैसे स्पेलिंग में थोड़ा बदलाव करके) डोमेन इस्तेमाल करते हैं। अगर यूआरएल अजीब या संदिग्ध लगे, तो तुरंत वहां से हट जाएं।
सर्च रिजल्ट्स के बजाय सीधे टाइप करें: गूगल पर किसी भी विषय को सर्च करने के बाद आने वाले पहले कुछ लिंक्स पर सीधे क्लिक करने से बचें (क्योंकि कई बार स्कैमर्स विज्ञापन चलाकर अपनी फर्जी साइट ऊपर ले आते हैं)। हमेशा आधिकारिक और जानी-मानी वेबसाइट का यूआरएल खुद एड्रेस बार में टाइप करके ही साइट पर जाएं।
’https://’ की जांच अवश्य करें: हमेशा ध्यान दें कि वेबसाइट का लिंक https:// से शुरू होना चाहिए। इसमें ‘s’ का मतलब ‘Secure’ (सुरक्षित) होता है। यदि किसी वेबसाइट के आगे केवल ‘http://’ लिखा है या ‘Not Secure’ का अलर्ट आ रहा है, तो वहां अपनी कोई भी गोपनीय जानकारी दर्ज न करें।
Google Play Protect को रखें ऑन: फर्जी ऐप्स और मैलवेयर से अपने स्मार्टफोन को सुरक्षित रखने के लिए अपने गूगल प्ले स्टोर की सेटिंग्स में जाकर ‘Play Protect’ फीचर को हमेशा ऑन (सक्रिय) रखें। यह आपके फोन में बैकग्राउंड में डाउनलोड होने वाले फर्जी ऐप्स को ब्लॉक कर देता है।
गोपनीय डेटा केवल ऑफिशियल डोमेन पर दें: अपनी कोई भी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या ओटीपी केवल और केवल सरकार की आधिकारिक वेबसाइट्स (जिनके अंत में आमतौर पर .gov.in या .nic.in होता है) पर ही दर्ज करें।
मंत्रालय की सलाह: किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और यदि आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध मैसेज या लिंक आता है, तो उसकी पुष्टि किए बिना आगे फॉरवर्ड न करें। सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
