6G टेक्नोलॉजी: भारत की दावेदारी और जुनिपर रिसर्च की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े; जानिए 5G से कितना अलग होगा नया नेटवर्क
6G टेक्नोलॉजी: भारत की दावेदारी और जुनिपर रिसर्च की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े; जानिए 5G से कितना अलग होगा नया नेटवर्क
5G नेटवर्क के तेजी से होते विस्तार के बीच अब पूरी दुनिया में अगली पीढ़ी की टेलीकॉम तकनीक यानी 6G को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारत भी उन गिने-चुने और अग्रणी देशों में शामिल है, जो 6G की टेस्टिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार इसके लिए देश में विशेष ‘6G टेस्ट बेड’ बनाने की घोषणा भी कर चुकी है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी हाल ही में दावा किया था कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा, जो दुनिया में सबसे पहले 6G सर्विस लॉन्च करेंगे।
हालांकि, वैश्विक रिसर्च फर्म जुनिपर रिसर्च (Juniper Research) की एक हालिया रिपोर्ट ने भारत के इन दावों के बीच एक नया पहलू सामने रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, 6G सर्विस की रेस में भारत अमेरिका और चीन जैसे देशों से थोड़ा पिछड़ सकता है।
जुनिपर (Juniper) की रिपोर्ट: टॉप-9 देशों की सूची से भारत बाहर
रिसर्च फर्म जुनिपर के अनुमानों के मुताबिक, दुनिया में 6G सेवाओं का कमर्शियल (व्यावसायिक) लॉन्च वर्ष 2029 में होने की उम्मीद है।
शुरुआती कनेक्शन: सर्विस लॉन्च होते ही वैश्विक स्तर पर 6G कनेक्शन की संख्या करीब 46 लाख तक पहुंच जाएगी।
एंट्री में देरी: जुनिपर ने 6G सेवा को सबसे पहले अपनाने वाले दुनिया के टॉप-9 देशों की सूची जारी की है, जिसमें भारत का नाम शामिल नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत शीर्ष-10 देशों में तो जगह बना सकता है, लेकिन वह अमेरिका और चीन के बाद ही इसे शुरू कर पाएगा।
किस देश का रहेगा दबदबा?
सबसे पहले लॉन्च: रिपोर्ट के अनुसार, 6G सर्विस की आधिकारिक शुरुआत सबसे पहले अमेरिका और दक्षिण कोरिया में देखने को मिलेगी।
सबसे बड़ा मार्केट: वर्ष 2030 तक चीन 6G सब्सक्राइबर्स के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बनकर उभरेगा। चीन के बाद इस रेस में अमेरिका और कनाडा का नंबर आएगा।
टॉप-9 देश: इस सूची में अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन और कनाडा के अलावा सऊदी अरब, फ्रांस, कतर, ब्रिटेन और जापान को जगह मिली है।
💡 भारत के लिए सकारात्मक पहलू: रिपोर्ट में यह साफ तौर पर कहा गया है कि भले ही भारत शुरुआती कमर्शियल लॉन्च करने वाले टॉप-9 देशों में न हो, लेकिन जर्मनी, भारत और यूएई (UAE) जैसे देश 6G के वैश्विक विकास, रिसर्च और इसके तकनीकी विस्तार (Expansion) में सबसे अहम और निर्णायक भूमिका निभाएंगे। जुनिपर का अनुमान है कि वर्ष 2035 तक दुनिया में 6G यूजर्स की कुल संख्या 2.9 अरब (290 करोड़) तक पहुंच जाएगी।
5G से कितना अलग और कितना एडवांस होगा 6G?
6G नेटवर्क केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने का जरिया नहीं होगा, बल्कि यह पूरी तरह से कनेक्टिविटी की परिभाषा बदल देगा:
टेराहर्ट्ज स्पेक्ट्रम (THz Spectrum): 6G में डेटा ट्रांसफर के लिए टेराहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया जाएगा। यह 5G की तुलना में बहुत उच्च (High) फ्रीक्वेंसी वाली तरंगें होंगी, जो बिजली की रफ्तार से भारी-भरकम डेटा को पलक झपकते ही ट्रांसफर करने में सक्षम होंगी।
पूरी तरह AI नेटिव (AI-Native Based): जहां 5G में एआई को बाद में जोड़ा गया, वहीं 6G नेटवर्क पूरी तरह से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नेटिव’ होगा। इसका मतलब है कि यह नेटवर्क खुद के एआई पर काम करेगा, जिससे नेटवर्क ट्रैफिक मैनेजमेंट और सेल्फ-हीलिंग (खराबियों को खुद ठीक करना) बेहद आसान हो जाएगी।
ISAC टेक्नोलॉजी: इसमें इंटिग्रेटेड सेंसिंग एंड कम्युनिकेशन (ISAC) तकनीक मिलेगी। यह एडवांस कम्युनिकेशन सर्विस नेटवर्क को केवल डेटा ट्रांसफर करने तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि यह आसपास के माहौल को सेंस (भांपने) और मैप करने की क्षमता भी देगी, जिससे ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और होलोग्राफिक कम्युनिकेशन को नया आयाम मिलेगा।
