Friday, May 29, 2026
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इस्तीफे के बाद भावुक हुए सिद्धारमैया: बोले- ‘संविधान न होता तो चरवाहा ही रह जाता, आखिरी सांस तक लड़ूंगा’

इस्तीफे के बाद भावुक हुए सिद्धारमैया: बोले- ‘संविधान न होता तो चरवाहा ही रह जाता, आखिरी सांस तक लड़ूंगा’

​बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता सिद्धारमैया ने गुरुवार को एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। बेंगलुरु के लोक भवन में राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बावजूद वे सक्रिय राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि वह अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक देश के संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद भावुक नजर आ रहे सिद्धारमैया ने अपने अतीत को याद करते हुए भारतीय संविधान के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।

​”संविधान ही मेरा धर्म है, मतदाता ही मेरे भगवान हैं”

​सिद्धारमैया ने रूंधे हुए गले से अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन के सफर को साझा करते हुए कहा:

​”मैं अपनी आखिरी सांस तक सक्रिय राजनीति में रहूंगा और उन ताकतों के खिलाफ लड़ता रहूंगा जो संविधान और देश के सौहार्द को खतरा पहुंचाती हैं। आज मैं जो कुछ भी हूँ, संविधान की वजह से हूँ। अगर बाबासाहेब का संविधान न होता, तो मुझे शिक्षा न मिलती और न ही मैं कभी राज्य का मंत्री या मुख्यमंत्री बन पाता। मैं आज भी एक चरवाहा ही बना रहता।”

​कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता डॉ. राजकुमार का जिक्र करते हुए निवर्तमान मुख्यमंत्री ने कहा, “जैसे डॉ. राजकुमार अपने प्रशंसकों को भगवान कहते थे, वैसे ही एक राजनेता के रूप में मेरा मानना है कि संविधान ही मेरा धर्म है और सूबे के मतदाता ही मेरे भगवान हैं। मुझे कर्नाटक के सात करोड़ लोगों की सेवा करने का सौभाग्य मिला। जनता ने मुझे दो बार मुख्यमंत्री और दो बार नेता प्रतिपक्ष के रूप में सेवा करने का अवसर दिया, जिसके लिए मैं उनका सदैव ऋणी रहूंगा।”

​हाईकमान का आदेश और इस्तीफे की वजह

​इस्तीफे की प्रक्रिया और पार्टी के भीतर ‘पावर शेयरिंग’ पर खुलकर बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि वे हमेशा से अनुशासन प्रिय रहे हैं।

​आलाकमान का निर्देश: “मैंने विधानसभा के अंदर और बाहर हमेशा यह कहा था कि जब भी पार्टी हाईकमान मुझे निर्देश देगा, मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा। दो दिन पहले आलाकमान ने मुझसे इस्तीफा देने को कहा और अपने वादे को निभाते हुए मैंने आज अपना त्यागपत्र सौंप दिया।”

​बहुमत का दावा: उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी के पास 138 विधायकों का प्रचंड समर्थन है और अन्य निर्दलीयों ने भी समर्थन दिया है। हमारे पास पूर्ण बहुमत है। अब राज्यपाल को अगले मुख्यमंत्री (डीके शिवकुमार) को जल्द सरकार बनाने का न्योता देना चाहिए।”

​सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खड़गे का जताया आभार

​सिद्धारमैया ने वर्ष 2006 में जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस से निष्कासित होने के बाद कांग्रेस में शामिल होने के अपने दिनों को याद किया। उन्होंने भावुक होकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की:

​अहमद पटेल की भूमिका: उन्होंने बताया कि जब वे जेडीएस से अलग होकर ‘अहिंदा आंदोलन’ (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित आंदोलन) का नेतृत्व कर रहे थे, तब कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल ने सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात कराई थी, जिसके बाद वे कांग्रेस में आए।

​खड़गे का साथ: उन्होंने याद किया कि जब वे अपने साथ 8 विधायकों को लेकर कांग्रेस में शामिल हुए थे, तब मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक कांग्रेस (KPCC) के अध्यक्ष थे। उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का विशेष आभार जताया।

​”विचारधारा और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया”

​अपने 8 वर्षों के मुख्यमंत्री के कार्यकाल (दो अलग-अलग कार्यकालों) को याद करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी समाजवादी विचारधारा से समझौता नहीं किया। उन्होंने गरीबों को मुफ्त भोजन (अन्न भाग्य योजना) और आर्थिक सहायता देने की नीतियों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने गर्व से कहा, “मैंने कर्नाटक के पानी (कावेरी विवाद), यहां की समृद्ध जमीन और कन्नड़ भाषा के गौरव के मामले में कभी कोई समझौता नहीं किया और जीवन के अंतिम क्षण तक इन सिद्धांतों पर अडिग रहूँगा।”

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