ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत रद्द होते ही एक्शन में CBI, पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह भोपाल से गिरफ्तार
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत रद्द होते ही एक्शन में CBI, पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह भोपाल से गिरफ्तार
भोपाल: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल ‘ट्विशा शर्मा मामले’ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को एक बेहद बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई की टीम ने मध्य प्रदेश की पूर्व जिला न्यायाधीश (रिटायर्ड जज) गिरिबाला सिंह को भोपाल स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। गिरिबाला सिंह पर अपनी ही बहू ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उसे कथित रूप से आत्महत्या के लिए मजबूर करने के बेहद गंभीर आरोप हैं।
यह हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा पूर्व जज की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज किए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई है।
भारी पुलिस बल के साथ सुबह 10:30 बजे पहुंची CBI
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की एक विशेष टीम गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के बंगले पर पहुंची।
इलाके में नाकेबंदी: मामले की संवेदनशीलता और पूर्व जज के रसूख को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी।
5 घंटे तक पूछताछ: सीबीआई के जांच अधिकारियों ने घर के भीतर ही गिरिबाला सिंह से लगभग 5 घंटे से अधिक समय तक सघन पूछताछ की। संतोषजनक जवाब न मिलने और सबूतों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
कोर्ट में पेशी: मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने पहुंचे बाग सेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद सीबीआई आरोपी पूर्व जज का मेडिकल परीक्षण कराकर उन्हें गुरुवार को ही विशेष अदालत में पेश करेगी।
शादी के महज 5 महीने बाद संदिग्ध हालात में मौत
यह पूरा मामला भोपाल के न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
दिसंबर 2025 में हुई थी शादी: मृतका ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह के साथ बेहद धूमधाम से हुई थी।
मई में मिला शव: शादी के महज पांच महीने बाद, बीते 12 मई को ट्विशा अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। ट्विशा के मायके पक्ष ने तुरंत ससुराल वालों पर गंभीर दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया था।
निचली अदालत ने दी थी राहत, हाई कोर्ट ने पलटा फैसला:
घटना के दो दिन बाद ही रसूखदार सास गिरिबाला सिंह ने भोपाल सत्र अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। 15 मई को 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने उनकी ढलती उम्र और मृतका के खाते में कुछ पैसे ट्रांसफर किए जाने के तर्कों को आधार मानकर उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी।
हालांकि, बुधवार को हाई कोर्ट के अवकाशकालीन न्यायाधीश जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने सत्र न्यायालय के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए 17 पन्नों के आदेश में पूर्व जज की जमानत को तुरंत रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि निचली अदालत ने कई चश्मदीद सबूतों और गंभीर तथ्यों की अनदेखी की थी।
हाई कोर्ट के आदेश में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया है, जिनकी वजह से गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी जरूरी हो गई थी:
व्हाट्सऐप चैट और प्रताड़ना: कोर्ट ने कहा कि मृतका ट्विशा की व्हाट्सऐप चैट और उसके परिवार के बयानों से यह साफ झलकता है कि प्रताड़ना के आरोप सिर्फ पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सास गिरिबाला सिंह भी इसमें बराबर की भागीदार थीं।
जबरन गर्भपात का दबाव: परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा पर गर्भपात (Abortion) कराने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। अदालत ने भी माना कि रिकॉर्ड के अनुसार ट्विशा का गर्भपात कराया जाना एक स्वीकृत तथ्य है।
पोस्टमार्टम में चोटों के निशान: हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की प्राथमिक वजह फांसी लगाना (Asphyxia due to hanging) बताई गई है, लेकिन हाई कोर्ट ने नोट किया कि ट्विशा के शरीर पर 6 से 7 अतिरिक्त गंभीर चोटों के निशान थे, जो उसके बाएं हाथ, उंगली और सिर पर पाए गए। बाद की फॉरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं, बल्कि मौत से पहले की थीं।
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका: अदालत में सुनवाई के दौरान ट्विशा के पिता के वकील ने एक बेहद गंभीर दलील दी। उन्होंने कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह खुद एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और वे ‘साइबर फॉरेंसिक’ व ‘क्राइम सीन मैनेजमेंट’ में विशेष रूप से प्रशिक्षित रही हैं। ऐसे में इस बात की प्रबल आशंका है कि उन्होंने अपने कानूनी और तकनीकी अनुभव का गलत इस्तेमाल कर घटनास्थल (Crime Scene) से जरूरी सबूतों को नष्ट या उनके साथ छेड़छाड़ की हो।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस संवेदनशील मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 व 4 के तहत कड़ाई और गहराई से जांच की आवश्यकता है, जिसके बाद सीबीआई ने यह त्वरित एक्शन लिया है।
