जलवायु परिवर्तन की मार: WMO की चेतावनी, अगले 5 वर्षों में टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड; 1.5°C की लक्ष्मण रेखा पार होने का बड़ा खतरा
जलवायु परिवर्तन की मार: WMO की चेतावनी, अगले 5 वर्षों में टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड; 1.5°C की लक्ष्मण रेखा पार होने का बड़ा खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वैश्विक तापमान को लेकर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। यूके मेट ऑफिस (UK Met Office) द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले कुछ वर्ष पूरी दुनिया के लिए भयानक रूप से गर्म होने वाले हैं। वैश्विक तापमान में होने वाली यह अभूतपूर्व बढ़ोतरी पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी, जिससे मानव जीवन, कृषि और पर्यावरण पर गंभीर संकट मंडराएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 के बाद से अब तक के इतिहास के 11 सबसे गर्म वर्ष दर्ज किए जा चुके हैं और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की यह खतरनाक रफ्तार रुकने का नाम नहीं ले रही है।
5 वर्षों का औसत तापमान छू सकता है खतरनाक स्तर
WMO की वैश्विक रिपोर्ट के मुख्य और बेहद चौंकाने वाले बिंदु निम्नलिखित हैं:
1.3 से 1.9 डिग्री की बढ़ोतरी: 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले (1850–1900) के स्तर से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है।
75% आशंका: इस बात की लगभग 75 प्रतिशत संभावना है कि इन पांच वर्षों का सामूहिक औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की उस महत्वपूर्ण और संवेदनशील सीमा को पार कर जाएगा, जिसे वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के लिए ‘सुरक्षित’ माना था।
91% अस्थायी खतरा: इसकी 91 प्रतिशत संभावना है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष ऐसा जरूर आएगा, जब वैश्विक तापमान अस्थायी (Temporary) रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाएगा। इसके अलावा, 86% चांस है कि कोई एक साल इतिहास के सबसे गर्म साल (2024) का रिकॉर्ड भी तोड़ देगा।
2026 के अंत में दस्तक देगा ‘अल नीनो’, 2027 में मचेगी तबाही
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 के अंत में एक बार फिर ‘अल नीनो’ (El Niño) की स्थिति बनने की प्रबल संभावना है।
अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान को बढ़ाने वाली एक प्राकृतिक घटना है, जो पूरी दुनिया के मौसम चक्र को बिगाड़ देती है।
इससे पहले अल नीनो ने ही 2023 और 2024 को अब तक के सबसे गर्म वर्षों में तब्दील किया था। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार आने वाले अल नीनो के कारण साल 2027 इतिहास का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है।
आर्कटिक क्षेत्र में 3 गुना तेजी से पिघलेगी बर्फ
रिपोर्ट में सबसे डरावना अनुमान आर्कटिक (ध्रुवीय) क्षेत्र को लेकर लगाया गया है। आने वाले वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में कई गुना अधिक गर्म हो सकता है। वहां सर्दियों का तापमान सामान्य से करीब 2.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने की आशंका है। बर्फ तेजी से पिघलने के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा।
इसके साथ ही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और सूखे का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। अमेज़न के जंगलों में भयंकर सूखे और साइबेरिया या उत्तरी यूरोप में अत्यधिक विनाशकारी बारिश (बाढ़) देखने को मिल सकती है।
पेरिस समझौते की प्रासंगिकता पर बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2015 के ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते (Paris Agreement) के तहत दुनिया के देशों ने तापमान बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर रखने का जो संकल्प लिया था, उसे लंबे समय तक बनाए रखना अब लगभग असंभव होता जा रहा है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि एक या दो साल के लिए इस सीमा का टूटना पेरिस समझौते की पूरी तरह विफलता नहीं है (क्योंकि समझौता दशकों के औसत तापमान पर आधारित है), लेकिन यह इस बात का स्पष्ट अलार्म है कि दुनिया भर की सरकारों को अपनी ऊर्जा नीति और पर्यावरण रणनीतियों में तत्काल बड़े बदलाव करने होंगे, अन्यथा वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानव अस्तित्व को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
