कान खराब होने का डर या कैंसर का खतरा? महंगे TWS छोड़ अब ‘तार वाले’ ईयरफोन्स पर लौट रहे हैं सेलेब्स
कान खराब होने का डर या कैंसर का खतरा? महंगे TWS छोड़ अब ‘तार वाले’ ईयरफोन्स पर लौट रहे हैं सेलेब्स
मुंबई, 25 मई। पिछले कुछ सालों में वायरलेस ईयरबड्स यानी TWS (True Wireless Stereo) का क्रेज इस कदर बढ़ा कि लगा जैसे तार वाले ईयरफोन्स का दौर हमेशा के लिए खत्म हो गया। लेकिन हाल ही में टेक और फैशन की दुनिया में एक बड़ा और हैरान करने वाला यू-टर्न देखने को मिल रहा है। प्रियंका चोपड़ा, शाहिद कपूर और टाइगर श्रॉफ जैसे बॉलीवुड सितारों से लेकर हॉलीवुड स्टार्स ड्रेक, बेला हदीद और जेक एलोर्डी तक, करोड़ों कमाने वाले ये सेलेब्स अब महंगे वायरलेस बड्स को छोड़कर वापस ‘तार वाले ईयरफोन्स’ (Wired Earphones) का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं।
इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है कि आखिर लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्या इसके पीछे सिर्फ नया फैशन है या फिर सेहत से जुड़ा कोई बड़ा डर?
क्या वाकई है कैंसर और रेडिएशन का खतरा?
इंटरनेट पर कई जगह यह दावा किया जा रहा है कि ब्लूटूथ ईयरबड्स से निकलने वाला रेडिएशन कैंसर का कारण बन सकता है, जिसने यूजर्स को चिंता में डाल दिया है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वैज्ञानिक सच्चाई:
एक्सपर्ट्स की राय: ब्लूटूथ डिवाइस से नॉन-आयोनाइजिंग (Non-ionizing) रेडिएशन यानी बेहद कम फ्रीक्वेंसी वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स (EMF) निकलती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं के मुताबिक, यह रेडिएशन स्मार्टफोन के मुकाबले 10 से 400 गुना तक कम होता है और इससे सीधे तौर पर डीएनए (DNA) डैमेज या कैंसर होने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
हालांकि, कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात को लेकर जरूर सचेत करते हैं कि घंटों तक सीधे कान के अंदर (In-ear) ब्लूटूथ डिवाइस लगाए रखने से और तेज आवाज में गाने सुनने से कान खराब होने (Hearing Loss) और सिरदर्द की समस्या जरूर बढ़ सकती है। इसी वजह से कई लोग एहतियात के तौर पर तारों वाले ईयरफोन्स को सुरक्षित मान रहे हैं।
सेलेब्स के ‘तार’ की ओर लौटने के 4 बड़े कारण
केवल सेहत ही नहीं, बल्कि कई व्यावहारिक और सांस्कृतिक वजहों से लोग वापस पुराने दौर की तकनीक को अपना रहे हैं:
1. ‘नो चार्जिंग, नो टेंशन’ (बैटरी की झंझट से मुक्ति)
महंगे से महंगे TWS की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी बैटरी लाइफ है। कुछ घंटों के इस्तेमाल के बाद उन्हें केस में रखकर चार्ज करना ही पड़ता है। इसके विपरीत, वायर्ड ईयरफोन्स को कभी चार्ज करने की जरूरत नहीं होती। हॉलीवुड सिंगर दुआ लीपा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे हमेशा अपने बैग में तीन वायर्ड ईयरफोन्स रखती हैं, क्योंकि ट्रैवलिंग के दौरान वे चार्जिंग का एक और सिरदर्द नहीं पालना चाहतीं।
2. सुपीरियर साउंड क्वालिटी और जीरो लैग
म्यूजिक लवर्स और ऑडियोफाइल्स (Audiophiles) आज भी वायर्ड ईयरफोन्स को ही तरजीह देते हैं। ब्लूटूथ ट्रांसमिशन के दौरान ऑडियो डेटा कंप्रेस होता है, जिससे साउंड क्वालिटी थोड़ी प्रभावित होती है। इसके अलावा गेमिंग या वीडियो कॉलिंग के दौरान ब्लूटूथ में ‘लैग’ (आवाज का देर से आना) की समस्या होती है, जबकि वायर्ड ईयरफोन्स में जीरो-लेटेंसी और बिल्कुल क्लियर आवाज मिलती है।
3. प्राइवेसी और हैकिंग का डर
ब्लूटूथ एक वायरलेस नेटवर्क है, जिसे हैक किए जाने या डेटा ट्रैक होने का जोखिम हमेशा बना रहता है। सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाज से कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां और वीआईपी (जैसे अमेरिकी नेता कमला हैरिस) हमेशा वायर्ड ईयरफोन्स का ही इस्तेमाल करते हैं ताकि कोई उनकी बातचीत को ट्रेस न कर सके।
4. Y2K नॉस्टेल्जिया और नया ‘कूल’ स्टेटस
आज के दौर में जहां हर चीज डिजिटल और एआई (AI) से संचालित हो रही है, युवा पीढ़ी (Gen Z) के बीच ‘अनालॉग लाइफस्टाइल’ का क्रेज बढ़ रहा है। जैसे फिल्म कैमरा और विनाइल रिकॉर्ड्स वापस आ रहे हैं, वैसे ही कानों से लटकता हुआ तार अब एक ‘फैशन स्टेटमेंट’ बन चुका है। इंस्टाग्राम पर #WiredEarphones जैसे टैग्स को करोड़ों व्यूज मिल रहे हैं। टेक एक्सपर्ट्स इसे ‘काउंटर-सिग्नलिंग’ कहते हैं—यानी जब हर कोई वायरलेस पहनकर एक जैसा दिख रहा हो, तो तार वाला ईयरफोन लगाकर आप भीड़ से अलग और ‘कूल’ नजर आते हैं।
टेक मार्केट में बड़ा उछाल
यह बदलाव सिर्फ हवा-हवाई नहीं है। मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां पिछले पांच सालों से वायर्ड ईयरफोन्स की बिक्री लगातार गिर रही थी, वहीं साल 2026 के शुरुआती हफ्तों में इनकी बिक्री में 20% का अचानक उछाल देखा गया है। अब मोबाइल कंपनियां भी इस ट्रेंड को भांपते हुए सीधे USB-C पोर्ट वाले वायर्ड ईयरफोन्स बाजार में उतार रही हैं, ताकि बिना किसी कनवर्टर के इन्हें नए स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल किया जा सके।
