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राष्ट्रपति भवन में छलके आंसू: हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की ओर से ग्रहण किया ‘पद्म विभूषण’

राष्ट्रपति भवन में छलके आंसू: हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की ओर से ग्रहण किया ‘पद्म विभूषण’

​नई दिल्ली, 25 मई। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित हुए प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार समारोह (2026) के दौरान एक बेहद भावुक कर देने वाला पल देखने को मिला। हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ और दिग्गज अभिनेता दिवंगत धर्मेंद्र को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह सर्वोच्च सम्मान ग्रहण करने जब उनकी जीवनसंगिनी और सीनियर एक्ट्रेस हेमा मालिनी मंच पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण की गवाह बनने के लिए धर्मेंद्र की बेटी अहाना देओल भी उनके साथ दिल्ली पहुंची थीं।

​छह दशकों के सफर को मिला सम्मान

​धर्मेंद्र को यह सम्मान भारतीय सिनेमा और राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है। राष्ट्रपति भवन जाने से पहले एक बेहद निजी और भावनात्मक बातचीत में हेमा मालिनी ने अपने दिल के जज्बात साझा किए। उन्होंने कहा:

​”धर्मजी को देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार दिया गया है। वे सचमुच इसके हकदार हैं। शायद बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था, लेकिन कोई बात नहीं। छह दशकों से ज्यादा समय से उन्होंने अपने कालजयी अभिनय, सादगी, गरिमा और सांस्कृतिक मूल्यों के जरिए पूरे देश के दिलों में जगह बनाई है। फिल्मों से परे, वे भारत की आत्मा, उसकी परंपरा और मानवता का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

​हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र को सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का एक ‘लिविंग इंस्टीट्यूशन’ (जीवंत संस्थान) बताया।

​खट्टा-मीठा पल: पिछले 6 महीने की कमी ने किया भावुक

​बातचीत के दौरान जब हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की गैर-मौजूदगी का जिक्र किया, तो उनका गला भर आया। उन्होंने बताया कि उनके बिना जिंदगी की कल्पना करना आज भी कितना मुश्किल है।

​पारिवारिक जुड़ाव: धर्मेंद्र को याद करते हुए हेमा ने कहा, “वे एक प्यारे, अद्भुत और देखभाल करने वाले पति रहे हैं। मेरी बेटियों के लिए एक बहुत ही स्नेहिल पिता और मेरे नाती-पोतों के लिए एक प्यारे दादा रहे हैं। वे एक नेक-इरादे वाले मित्र, सच्चे दार्शनिक और भरोसेमंद मार्गदर्शक हैं।”

​अकेलेपन का दर्द: पिछले छह महीनों के अकेलेपन को बयां करते हुए उन्होंने कहा, “जब तक हम साथ रहे, घर में उनकी मौजूदगी हमेशा बहुत प्यारी रही और अचानक वह अब वहां नहीं हैं। यह सोचना भी मुश्किल है कि हम उनके बिना जी रहे हैं।” उन्होंने इस अवॉर्ड समारोह को अपने लिए एक ‘खट्टा-मीठा’ पल बताया, जहां गर्व भी था और एक गहरी कमी का अहसास भी।

​’मैं मन ही मन उनका हाथ थामकर चलूंगी’

​हेमा मालिनी के लिए यह पुरस्कार केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि एक बेहद गहरा और निजी सम्मान है। पुरस्कार ग्रहण करने से पहले उन्होंने अपनी एक खूबसूरत मानसिक तस्वीर साझा करते हुए कहा:

​”आज मैं यह पुरस्कार पूरी विनम्रता के साथ अपने दोनों परिवारों और दुनिया भर में उनके लाखों प्रशंसकों की ओर से स्वीकार करती हूं। मैं मन ही मन यह कल्पना करूंगी कि वह मेरे ठीक बगल में खड़े हैं। मैं हमेशा कहती हूं कि मैं उनका हाथ थामकर चलूंगी और फिर राष्ट्रपति से यह पुरस्कार ग्रहण करूंगी।”

​जब राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में धर्मेंद्र के नाम की घोषणा हुई, तो हेमा मालिनी और अहाना देओल दोनों के ही आंसू छलक पड़े। यह पल भारतीय सिनेमा के इतिहास और देओल परिवार के लिए हमेशा के लिए यादगार बन गया।

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