अब्राहम अकॉर्ड्स का विस्तार: ईरान के साथ समझौते के बाद मुस्लिम देशों से इजरायल को मान्यता देने की उम्मीद में डोनाल्ड ट्रंप
अब्राहम अकॉर्ड्स का विस्तार: ईरान के साथ समझौते के बाद मुस्लिम देशों से इजरायल को मान्यता देने की उम्मीद में डोनाल्ड ट्रंप
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक बड़े शांति समझौते की रूपरेखा तैयार हो रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट को एक बड़े कूटनीतिक अवसर में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के साथ एक बार समझौता (डील) फाइनल होने और युद्ध खत्म होने के बाद, मध्य-पूर्व (West Asia) में ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ (Abraham Accords) का दायरा बढ़ाया जाए। इसके तहत वे उन मुस्लिम देशों पर भी इजरायल के साथ आधिकारिक संबंध स्थापित करने और उसे मान्यता देने का दबाव बना रहे हैं, जिनके अब तक इजरायल से कोई रिश्ते नहीं हैं।
अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ‘एक्सियोस’ (Axios) ने वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे को लेकर बीते शनिवार (23 मई 2026) को कई प्रमुख अरब और मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण संयुक्त फोन कॉल (कॉन्फ्रेंस कॉल) पर बातचीत की है।
किन मुस्लिम देशों के नेताओं से ट्रंप ने की बात?
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब 1:00 बजे हुई इस हाई-लेवल फोन कॉल में अमेरिका के अलावा आठ प्रमुख मुस्लिम और अरब देशों के नेता व शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। ट्रंप ने जिन देशों से संपर्क साधा, उनमें शामिल हैं:
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन।
इसके अलावा इस कॉल में गैर-अरब मुस्लिम देश तुर्की और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व (पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर) ने भी हिस्सा लिया।
फोन कॉल पर ट्रंप ने क्या कहा? (जब लाइन पर छा गया सन्नाटा)
इस बेहद गुप्त मानी जा रही बातचीत के दौरान ट्रंप का सबसे मुख्य एजेंडा सऊदी अरब और इजरायल के बीच ऐतिहासिक समझौता कराना था। ट्रंप ने सभी नेताओं से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जैसे ही अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध खत्म करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, वैसे ही सभी मुस्लिम देश इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य (नॉर्मलाइज) करने की पहल को आगे बढ़ाएंगे।
दिलचस्प वाकया: ट्रंप ने पूछा- ‘क्या सब लाइन पर हैं?’
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, जब ट्रंप ने इस कॉल पर खुले तौर पर इन देशों से इजरायल को मान्यता देने और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की बात कही, तो दूसरी तरफ से सभी मुस्लिम देशों के नेताओं के बीच अचानक गहरा सन्नाटा (Silence) पसर गया। किसी ने भी इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस पर ट्रंप ने माहौल को हल्का करने के लिए मजाक में पूछा, “क्या आप सभी अभी भी लाइन पर बने हुए हैं?”
इस बातचीत के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी एक पोस्ट लिखकर संकेत दिया कि इस शांति समझौते को तब और मजबूती मिलेगी जब ये देश ऐतिहासिक ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने तंजिया या उम्मीद भरे लहजे में यह भी लिखा, “कौन जानता है, शायद भविष्य में ईरान का इस्लामिक गणराज्य भी इसमें शामिल होना चाहे!”
आखिर क्या है ‘अब्राहम अकॉर्ड’?
शुरुआत: अब्राहम अकॉर्ड की शुरुआत साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुई थी।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका की मध्यस्थता (Mediator) के जरिए इजरायल और अरब देशों के बीच दशकों पुरानी कड़वाहट और दुश्मनी को खत्म कर उनके बीच व्यापारिक, कूटनीतिक और सैन्य संबंधों को बहाल करना है।
कौन-कौन जुड़े हैं: इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ हाथ मिलाया था। बाद में सूडान और मोरक्को भी इसका हिस्सा बने।
मौजूदा चुनौती: ट्रंप के इस कॉल में शामिल देशों में से सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान के इजरायल के साथ कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। सऊदी अरब ने पहले ही साफ किया है कि वह इजरायल में किसी भी सरकार के साथ तब तक हाथ नहीं मिलाएगा जब तक फिलिस्तीन के मुद्दे का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल जाता। ऐसे में ईरान डील के बहाने इजरायल को मान्यता दिलाने की ट्रंप की यह ‘क्रॉस-डील’ कूटनीति सफल होती है या नहीं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
