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ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, मीडिया और दोनों पक्षों की बयानबाजी पर लगाई रोक; जल्द जांच संभालेगी CBI

ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, मीडिया और दोनों पक्षों की बयानबाजी पर लगाई रोक; जल्द जांच संभालेगी CBI

​नई दिल्ली/भोपाल: देश के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में आज न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर बड़ी सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और भोपाल लोकल कोर्ट में इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया और सुनवाई की।

​अदालत ने मामले की जांच के तौर-तरीकों और मीडिया ट्रायल पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि सीबीआई (CBI) जल्द ही इस मामले की जांच अपने हाथों में लेगी।

​’जैसे मामले को हैंडल किया गया, हमें उसका दुख है’ – CJI सूर्यकांत

​सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले के घटनाक्रम और आरोपियों व गवाहों के इंटरव्यू दिखाए जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। गिरिबाला सिंह के इंटरव्यू का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई।

​सुनवाई के दौरान CJI ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:

​स्वतंत्र एजेंसी करे जांच: चीफ जस्टिस ने कहा, “हमें दुख है कि इस मामले को जिस तरह से हैंडल किया गया। मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को करनी चाहिए। चूंकि राज्य सरकार ने खुद सीबीआई जांच की मांग की है, इसलिए हम खुद आदेश नहीं देना चाहते, लेकिन जरूरी है कि इस पर जल्द कदम उठाया जाए।”

​आरोपियों के इंटरव्यू पर सवाल: अदालत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि इस संवेदनशील मामले में आरोपियों का इंटरव्यू क्यों किया जा रहा है?

​न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश गलत: CJI ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसा प्रोजेक्ट किया जा रहा है जैसे न्यायपालिका इस मामले को दबाने या इसमें दखल देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि न्यायपालिका मुकदमे को पटरी से उतार रही है, जबकि अदालत ने अभी तक मामले पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

​मीडिया और पक्षों को सख्त हिदायत: ‘पीड़ित परिवार का दुख न बढ़ाएं’

​सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया चैनलों और दोनों पक्षों से प्रीमेच्योर (वक्त से पहले) बयानबाजी तुरंत बंद करने को कहा है। अदालत ने मीडिया से भावुक अपील और निर्देश देते हुए कहा, “एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है, मीडिया दोस्त पीड़ित परिवार के पास जाकर उनका दुख और न बढ़ाएं। मीडिया को हमारे अनुरोध पर ध्यान देना चाहिए कि वे घरवालों या किसी के व्यक्तिगत बयानों के आधार पर खुद कोई फैसला (मीडिया ट्रायल) तय न करें, क्योंकि इससे मुख्य मुकदमे पर बुरा असर पड़ सकता है।”

​अदालत ने साफ शब्दों में आदेश दिया है कि संभावित गवाह और आरोपी अब कोई भी मीडिया बयान नहीं देंगे। उन्हें जो कुछ भी कहना है, वे सीधे जांच एजेंसी के सामने कहें।

​आज ही केस दर्ज कर सकती है CBI, नोटिफिकेशन का इंतजार

​सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बेंच को आश्वस्त किया कि सीबीआई इस मामले की जांच को पूरी तरह अपने पास लेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया है और उम्मीद जताई है कि केंद्रीय एजेंसी बिना वक्त गंवाए तुरंत जांच शुरू करेगी।

​सूत्रों के मुताबिक, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) से आधिकारिक नोटिफिकेशन मिलते ही सीबीआई आज ही इस मामले में नया केस दर्ज कर सकती है।

​क्या है पूरा मामला?

​ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ट्विशा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और उनसे दहेज की मांग की जा रही थी। परिवार ने मामले को दबाने और ‘कवर-अप’ करने के भी आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार उठ रहे इन गंभीर सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने एक विस्तृत नोट CJI सूर्यकांत के सामने रखा था, जिसके बाद चीफ जस्टिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए इस विशेष बेंच का गठन किया। फिलहाल, ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

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