देहरादून में ‘राम भरोसे’ मरीजों की जान: 1,896 अस्पतालों में से सिर्फ 143 के पास फायर NOC, पैनेसिया हादसे के बाद खुली पोल
देहरादून में ‘राम भरोसे’ मरीजों की जान: 1,896 अस्पतालों में से सिर्फ 143 के पास फायर NOC, पैनेसिया हादसे के बाद खुली पोल
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के अस्पतालों से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। शहर के ज्यादातर अस्पताल आज भी बिना फायर एनओसी (NOC) और अधूरे सुरक्षा इंतजामों के सहारे धड़ल्ले से चल रहे हैं। राज्य भर से मरीज जिस अस्पताल में अपनी जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वे अस्पताल खुद बड़े हादसों के केंद्र बनते जा रहे हैं।
अस्पतालों की इस घोर लापरवाही का एक भयावह उदाहरण बुधवार को देखने को मिला, जब राजधानी के पैनेसिया अस्पताल (Panacea Hospital) में अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में एक मरीज की मौत हो गई, जबकि कई अन्य मरीज गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा।
आंकड़ों का खौफनाक सच: सिर्फ 7.5% स्वास्थ्य केंद्रों के पास NOC
पैनेसिया अस्पताल के हादसे ने स्वास्थ्य और फायर विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में सुरक्षा मानकों को लेकर किस कदर खिलवाड़ किया जा रहा है:
कुल स्वास्थ्य केंद्र: देहरादून में कुल 1,896 अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं।
फायर एनओसी की स्थिति: इनमें से केवल 143 चिकित्सा संस्थानों के पास ही फायर विभाग की वैध एनओसी (No Objection Certificate) है।
यानी एक बहुत बड़ी संख्या में ऐसे अस्पताल चल रहे हैं, जहां आग लगने की स्थिति में मरीजों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकालने तक के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर फायर उपकरण या तो पूरी तरह खराब हैं या फिर सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर दीवार पर टंगे हैं।
फायर विभाग का एक्शन: 14 अस्पतालों को नोटिस जारी
उपनिदेशक (फायर ब्रिगेड) संदीप राणा ने मामले की गंभीरता पर आंकड़े साझा करते हुए बताया कि विभाग लगातार चूक करने वाले संस्थानों पर नजर रख रहा है।
जारी किए गए नोटिस: जनवरी 2025 से 21 मई 2026 के बीच, अकेले देहरादून में फायर सुरक्षा मानकों में गंभीर कमियां पाए जाने पर 14 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, अगर पूरे उत्तराखंड की बात करें, तो इस अवधि में प्रदेश के 68 अस्पतालों को नोटिस थमाए गए हैं।
पूरे उत्तराखंड का भी हाल बेहाल
यह लापरवाही सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सूबे में फैली हुई है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, पूरे उत्तराखंड राज्य में अब तक महज 583 अस्पतालों को ही फायर एनओसी जारी की जा सकी है। आंकड़ों का यह खेल साफ गवाही देता है कि जीवन रक्षक कहे जाने वाले ये संस्थान अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर कितने लापरवाह बने हुए हैं, जो कभी भी किसी बड़े वीभत्स हादसे को न्योता दे सकते हैं।
