पाकिस्तान में फिर खदान हादसा: खैबर पख्तूनख्वा में दो अलग-अलग घटनाओं में 2 खनिकों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल
पाकिस्तान में फिर खदान हादसा: खैबर पख्तूनख्वा में दो अलग-अलग घटनाओं में 2 खनिकों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल
पेशावर: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। यहाँ दो अलग-अलग कोयला खदानों में हुए हादसों में दो खनिकों (मजदूरों) की जान चली गई, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया है। इन लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने एक बार फिर पाकिस्तान के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने और लचर व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
पहली घटना: ढाई घंटे चला रेस्क्यू, फिर भी नहीं बची जान
स्थानीय मीडिया आउटलेट ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक, पहला हादसा अकोरवाल कोयला खदान की माइन नंबर 5 में पेश आया। यहाँ खदान के भीतर काम करने के दौरान अचानक ऊपर से भारी-भरकम मलबा गिर गया, जिसकी चपेट में आकर दो मजदूर मलबे के नीचे ही फंस गए।
घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। लगभग ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों मजदूरों को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन दुर्भाग्यवश तब तक एक मजदूर दम तोड़ चुका था। वहीं, दूसरे घायल मजदूर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि मृतक और घायल दोनों ही शांगला जिले के स्थानीय निवासी थे।
दूसरी घटना: चपरमश्ती क्षेत्र की खदान में हादसा
दूसरा हादसा चपरमश्ती क्षेत्र की एक कोयला खदान में हुआ। यहाँ भी हमेशा की तरह सामान्य रूप से खनन कार्य चल रहा था, तभी अचानक हुए एक हादसे में एक और मजदूर की मौत हो गई। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मृतक के शव को उसके पैतृक गांव भेज दिया गया, जहां रोते-बिलखते परिजनों ने उसे सुपुर्द-ए-खाक (अंतिम संस्कार) किया।
”मजदूरों की जान से हो रहा खिलवाड़” – श्रमिक संगठन
इन ताजा हादसों के बाद स्थानीय निवासियों और श्रमिक संगठनों का गुस्सा भड़क उठा है। उन्होंने पाकिस्तान की कोयला खदानों में बुनियादी सुरक्षा उपायों और उपकरणों की भारी कमी पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।
श्रमिक संगठनों ने सरकार से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और सभी खदानों में सख्त सुरक्षा नियम (Safety Protocols) लागू करने की पुरजोर मांग उठाई है। उनका कहना है कि मुनाफे के चक्कर में खदान मालिकों द्वारा सुरक्षा की अनदेखी की जाती है, जिसके कारण आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं और यहाँ काम करने वाले गरीब मजदूरों की जिंदगी पर हमेशा मौत का साया मंडराता रहता है।
बलूचिस्तान में भी हो चुके हैं ऐसे ही खूनी हादसे
पाकिस्तान की खदानों में सुरक्षा की स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने भी बलूचिस्तान प्रांत के बोलान और दुकी क्षेत्रों में हुए खदान हादसों में 5 मजदूरों की मौत हो गई थी।
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की एक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि बोलान की खदान में जहरीली मीथेन गैस का स्तर अचानक बेहद बढ़ गया था, जिसके कारण वहाँ काम कर रहे तीन श्रमिकों का दम घुट गया और तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई।
गैस का रिसाव और ऑक्सीजन की कमी बनी काल
विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में अधिकांश खदान हादसे खदानों के भीतर मीथेन गैस के खतरनाक जमाव, वेंटिलेशन की कमी और ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट के कारण दम घुटने से होते हैं। इसके अलावा, कई बार जर्जर उपकरणों और तेज रफ्तार खनन ट्रॉली से टकराने जैसी मैन्युअल दुर्घटनाएं भी मासूम मजदूरों की जान ले लेती हैं।
मुख्य बिंदु:
कहाँ हुआ हादसा: शांगला जिला, खैबर पख्तूनख्वा (पाकिस्तान)।
नुकसान: 2 मजदूरों की मौत, 1 गंभीर रूप से घायल।
बड़ा कारण: सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मीथेन गैस का रिसाव और मलबे का गिरना।
मांग: श्रमिक संगठनों ने सरकार से खदानों में सख्त सुरक्षा नियम लागू करने की अपील की।
