शुभेंदु अधिकारी का बड़ा हमला: ‘मिस्टर नेफ्यू’ की प्रॉपर्टी लिस्ट तैयार, 21 मई के पुनर्मतदान से पहले गरमाई बंगाल की सियासत
शुभेंदु अधिकारी का बड़ा हमला: ‘मिस्टर नेफ्यू’ की प्रॉपर्टी लिस्ट तैयार, 21 मई के पुनर्मतदान से पहले गरमाई बंगाल की सियासत
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त भारी भूचाल आया हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) के निशाने पर अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वो दिग्गज नेता आ गए हैं, जिनका नाम लंबे समय से भ्रष्टाचार के मामलों में उछलता रहा है। शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बिना नाम लिए टीएमसी के एक शीर्ष नेता पर सीधा हमला बोला और उन्हें बार-बार ‘मिस्टर नेफ्यू’ (भतीजे बाबू) कहकर संबोधित किया।
फाल्टा में आगामी 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान (Re-polling) से ठीक पहले मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भ्रष्टाचार और हिंसा में शामिल किसी भी चेहरे को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी तरफ, टीएमसी ने इस पूरी कार्रवाई को ‘चुनिंदा और बदले की राजनीति’ करार दिया है।
”हिसाब मांगा जाएगा”… ‘मिस्टर नेफ्यू’ की 24 संपत्तियां रडार पर
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी के इस बड़े नेता की कथित कंपनी की संपत्तियों की जांच शुरू करने का कड़ा संकेत दिया।
मुख्यमंत्री ने खुले मंच से चेतावनी देते हुए कहा, “मिस्टर नेफ्यू, मैं कल ही कोलकाता नगर निगम से आपकी कंपनी की संपत्तियों की पूरी सूची लेकर आया हूं। इस कंपनी की अकेले कोलकाता में 24 संपत्तियां हैं। इसके अलावा, दक्षिण 24 परगना के आमतला में एक महल जैसा आलीशान कार्यालय भी है। जनता की गाढ़ी कमाई की एक-एक पाई का हिसाब मांगा जाएगा।”
राजनीति के जानकारों का मानना है कि सीएम का यह सीधा इशारा डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की तरफ था, जिनके खिलाफ एक दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भड़काऊ टिप्पणी करने के मामले में बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
तीन IPS सस्पेंड, कॉल रिकॉर्ड्स से खुलेंगे पिछली सरकार के राज
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर मामले (अगस्त 2024) का जिक्र करते हुए शुक्रवार को लिए गए अपने बड़े फैसले को दोहराया। उन्होंने बताया कि इस मामले में कोताही बरतने के आरोप में पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, पूर्व डीसी इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता समेत तीन आईपीएस (IPS) अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
सीएम का बड़ा दावा: “इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। जब जांच एजेंसियां इनके कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सऐप चैट को खंगालकर सामने लाएंगी, तब बंगाल की जनता के सामने पिछली सरकार (टीएमसी सरकार) की असल करतूतें उजागर होंगी। लोगों को पता चलेगा कि सत्ता में बैठे लोग कितनी नीचे तक गिर गए थे।”
हिंसा फैलाने वालों की खैर नहीं, टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर को चेतावनी
मुख्यमंत्री ने फाल्टा सीट से टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान को भी मंच से खुलेआम चेतावनी दी।
उन्होंने याद दिलाया कि साल 2021 के चुनाव के बाद हुई भीषण हिंसा के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जिन 199 आरोपियों को ‘कुख्यात अपराधी’ घोषित किया था, उनमें जहांगीर खान का नाम भी शामिल था।
सीएम ने कहा, “21 मई का पुनर्मतदान खत्म होने दीजिए, जहांगीर के पुराने काले कृत्यों के लिए कानून के तहत उचित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
उन्होंने दक्षिण 24 परगना पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि 2021 की चुनावी हिंसा के पीड़ितों और हिंसा फैलाने वाले गुंडों की सूची तुरंत तैयार की जाए। चुनाव के बाद एक भी गुंडा घर में नहीं रहेगा और महिलाओं पर अत्याचार करने वाले सलाखों के पीछे होंगे।
टीएमसी का पलटवार: “हार के डर से चुनिंदा एफआईआर कर रही बीजेपी”
मुख्यमंत्री के इस चौतरफा हमले और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश रची जा रही है।
टीएमसी नेता तन्मय घोष ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा:
”हमने भाजपा के कई बड़े नेताओं के मुंह से बेहद भड़काऊ और अमर्यादित बयान सुने हैं। हमारा मानना है कि राजनीति हमेशा गरिमा के साथ की जानी चाहिए। इस तरह की चुनिंदा (Selective) एफआईआर पूरी तरह से गलत हैं। कानून का नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। टीएमसी से चुनाव हारने के डर के कारण केवल अभिषेक बनर्जी को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? यह बदले की भावना वाली राजनीति हमें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”
21 मई को होने वाले फाल्टा पुनर्मतदान से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस आक्रामक रुख और टीएमसी के पलटवार ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गर्मी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अब देखना होगा कि संपत्तियों की इस जांच की आंच कहां तक पहुंचती है।
