इराक में राजनीतिक गतिरोध खत्म: बिजनेसमैन अली फलीह कदीम अल-जैदी बने इराक के नए प्रधानमंत्री, ली पद की शपथ
लगभग पांच महीने से जारी भारी राजनीतिक गतिरोध और खींचतान के बाद, इराक को आखिरकार अपना नया प्रधानमंत्री मिल गया है। देश के प्रमुख बिजनेसमैन और बैंकर अली फलीह कदीम अल-जैदी (Ali Falih Kadhim al-Zaidi) ने इराक के नए प्रधानमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। 14 मई 2026 को इराकी संसद के एक विशेष सत्र के दौरान उन्होंने अपने आंशिक मंत्रिमंडल के साथ आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लिया।
पांच महीने से फंसा था पेंच
इराक में नवंबर 2025 में हुए संसदीय चुनावों के बाद से ही नई सरकार के गठन को लेकर शिया राजनीतिक दलों के गठबंधन ‘कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क’ (Coordination Framework) के भीतर भारी मतभेद चल रहे थे। पहले पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी का नाम आगे बढ़ाया गया था, लेकिन अमेरिकी विरोध और आंतरिक असहमति के बाद पिछले महीने (27 अप्रैल) गठबंधन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए 40 वर्षीय अली अल-जैदी को आम सहमति से अपना उम्मीदवार चुना। इसके बाद इराक के राष्ट्रपति निसार अमिदी (Nizar Amidi) ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया था।
कौन हैं अली फलीह अल-जैदी?
अली अल-जैदी इराक की आधुनिक राजनीति में एक पूरी तरह से नए चेहरे (Political Newcomer) हैं। वे इराक के इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में से एक बन गए हैं:
पृष्ठभूमि: उनका जन्म 1986 में बगदाद में हुआ था और उनका परिवार दक्षिणी इराकी प्रांत धी कार (Dhi Qar) से ताल्लुक रखता है।
शिक्षा व करियर: उन्होंने कानून और फाइनेंस में स्नातक (Bachelor) करने के साथ-साथ बैंकिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है। वे इराक बार एसोसिएशन के सदस्य भी हैं।
बिजनेस एम्पायर: राजनीति में आने से पहले अल-जैदी इराक के एक स्थापित मल्टीमिलियनेयर बिजनेसमैन रहे हैं। वे अल-जनूब इस्लामिक बैंक के पूर्व चेयरमैन, नेशनल होल्डिंग कंपनी के प्रमुख और ‘दिलाह टीवी’ (Dijlah TV) समेत कई फूड, एग्रीकल्चर व कंस्ट्रक्शन कंपनियों के मालिक हैं।
नई सरकार के सामने चुनौतियां अपार
हालांकि संसद ने अल-जैदी की सरकार को मंजूरी दे दी है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच पूर्ण सहमति न बन पाने के कारण उनके मंत्रिमंडल के कुल 23 पदों में से केवल 14 मंत्रियों को ही मंजूरी मिल सकी है। रक्षा (Defense) और गृह (Interior) जैसे 9 महत्वपूर्ण मंत्रालय फिलहाल खाली पड़े हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में जारी तनाव और देश की डगमगाती आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाना नए प्रधानमंत्री अल-जैदी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
