उत्तराखंड

राजभवन पहुंचा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल: बिगड़ती कानून व्यवस्था और ‘एनकाउंटर’ पर उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग

राजभवन पहुंचा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल: बिगड़ती कानून व्यवस्था और ‘एनकाउंटर’ पर उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग

​देहरादून | राजनीतिक डेस्क: उत्तराखंड में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से मुलाकात कर राज्य की वर्तमान स्थिति पर गहरा असंतोष जताया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक लखपत बुटोला के नेतृत्व में पहुंचे इस दल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कई गंभीर प्रकरणों की उच्च स्तरीय जांच कराने और नर्सिंग अभ्यर्थियों के हितों में निर्णय लेने की मांग की।

​”ध्वस्त हो चुकी है कानून व्यवस्था”

​राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है। पार्टी ने कहा कि हालिया घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कांग्रेस के अनुसार, आम आदमी का पुलिस पर से भरोसा उठता जा रहा है।

​इन प्रमुख मुद्दों पर घेरा:

​राजपुर रोड बार प्रकरण: देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक बार में हुई घटना का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने कहा कि इसमें पुलिस के उच्चाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को रसूखदार व्यक्तियों और अधिकारियों का संरक्षण मिल रहा है। इस मामले की न्यायायिक जांच की मांग की गई है।

​30 अप्रैल का एनकाउंटर: पुलिस मुठभेड़ में एक कथित अपराधी की मौत के मामले को कांग्रेस ने ‘संदिग्ध’ करार दिया है। प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस ने निर्धारित मानकों का पालन किया? इस प्रकरण की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी स्वतंत्र एजेंसी से समयबद्ध तरीके से कराने का आग्रह किया गया है।

​विधायक अरविंद पांडे का आरोप: भाजपा विधायक अरविंद पांडे द्वारा अपनी ही सरकार पर पुलिस के जरिए उत्पीड़न का आरोप लगाने के मामले को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया। ज्ञापन में कहा गया कि जब सत्ताधारी विधायक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।

​चंपावत और सतपुली की घटनाएं: चंपावत में नाबालिग युवती से जुड़े मामले और पौड़ी के सतपुली में पुलिस प्रताड़ना के कारण युवक की कथित आत्महत्या के मामले में भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई।

​नर्सिंग अभ्यर्थियों के लिए उठाई आवाज

​प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े नर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य का मुद्दा भी राज्यपाल के सामने रखा। कांग्रेस ने मांग की कि स्वास्थ्य महानिदेशिका द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुरूप राज्य सरकार को तत्काल निर्णय लेने के लिए निर्देशित किया जाए, ताकि लंबे समय से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

​प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?

​राज्यपाल से मिलने वाले इस दल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक लखपत बुटोला और कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शामिल थे। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि इन मामलों में सरकार ने पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की, तो पार्टी जनता के बीच जाकर उग्र आंदोलन करेगी।

​राजभवन का रुख: राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि राजभवन के हस्तक्षेप के बाद सरकार इन संवेदनशील मुद्दों पर क्या कदम उठाती है।

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