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इजरायल-UAE सीक्रेट मुलाकात का सस्पेंस: नेतन्याहू की गुप्त यात्रा के दावे पर बरपा हंगामा, अमीरात ने खबरों को नकारा

इजरायल-UAE सीक्रेट मुलाकात का सस्पेंस: नेतन्याहू की गुप्त यात्रा के दावे पर बरपा हंगामा, अमीरात ने खबरों को नकारा

​दुबई/तेल अवीव | अंतरराष्ट्रीय डेस्क

​मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई जिसने कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। इजरायल ने दावा किया कि उसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुपचाप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा किया और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से ‘सीक्रेट’ मुलाकात की। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद UAE ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘बेबुनियाद’ करार दे दिया।

​इजरायल का सनसनीखेज दावा: “ऐतिहासिक सफलता”

​इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक चौंकाने वाली पोस्ट साझा की। इस बयान में कहा गया कि “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” (ईरान के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान) के बीच नेतन्याहू गुप्त रूप से UAE पहुंचे।

​PMO के मुताबिक:

​प्रधानमंत्री नेतन्याहू और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच गहन चर्चा हुई।

​इस यात्रा को इजरायल और UAE के रिश्तों में एक “ऐतिहासिक सफलता” बताया गया।

​दावा किया गया कि यह दौरा युद्ध के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तालमेल का हिस्सा है।

​पर्दे के पीछे की कहानी: क्या था ‘तालमेल’?

​इजरायली अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ और ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट्स ने इस आग में घी डालने का काम किया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:

​इजरायल ने अपनी आयरन डोम बैटरी और सैनिक सुरक्षा के लिए UAE भेजे थे।

​मोसाद प्रमुख डेविड बरनिया ने संघर्ष के दौरान कम से कम दो बार गुप्त रूप से UAE की यात्रा की।

​दोनों देशों ने कथित तौर पर ईरान की एक बड़ी पेट्रोकेमिकल साइट पर हमले की योजना को लेकर भी चर्चा की।

​UAE का कड़ा रुख: “हम कुछ भी छिपाकर नहीं करते”

​इजरायल के इन दावों के तुरंत बाद UAE के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। अमीरात ने साफ लहजे में कहा कि नेतन्याहू की यात्रा या किसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल के आने की खबरें पूरी तरह से गलत और भ्रामक हैं।

​UAE विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया:

​”इजरायल के साथ हमारे संबंध सार्वजनिक हैं और अब्राहम समझौते के तहत आधिकारिक तौर पर चलते हैं। हम किसी भी गुप्त व्यवस्था या बिना घोषणा वाली यात्राओं में विश्वास नहीं रखते। जब तक हमारी संबंधित एजेंसियां आधिकारिक घोषणा न करें, तब तक ऐसे दावे बेबुनियाद हैं।”

​क्यों उठ रहे हैं सवाल?

​विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट की राजनीति इस समय बेहद नाजुक दौर में है। एक तरफ इजरायल यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अरब देश ईरान के खिलाफ उसके साथ खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ UAE अपनी तटस्थ छवि बनाए रखना चाहता है ताकि क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा न हो।

​अब सवाल यह उठता है कि क्या इजरायली PMO ने घरेलू राजनीति के लिए यह दावा किया, या फिर इस ‘सीक्रेट’ मुलाकात के पीछे कोई ऐसी सच्चाई है जिसे सार्वजनिक करना फिलहाल दोनों देशों के लिए जोखिम भरा हो सकता है? फिलहाल, इस कूटनीतिक खींचतान ने पूरे क्षेत्र की राजनीति को गरमा दिया है।

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