मानसून और चारधाम यात्रा पर आपदा का खतरा: मंत्री मदन कौशिक ने रिस्पांस टाइम घटाने के दिए निर्देश, ‘अलर्ट मोड’ में उत्तराखंड
उत्तराखंड में मानसून और चारधाम यात्रा के मद्देनजर सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए कमर कस ली है। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने तैयारियों को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
यहाँ इस समीक्षा बैठक की मुख्य बातें और आपदा से निपटने का ‘प्लान’ दिया गया है:
मानसून और चारधाम यात्रा पर आपदा का खतरा: मंत्री मदन कौशिक ने रिस्पांस टाइम घटाने के दिए निर्देश, ‘अलर्ट मोड’ में उत्तराखंड
देहरादून: मानसून सीजन की आहट और चारधाम यात्रा की भीड़ को देखते हुए उत्तराखंड सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की बैठक में स्पष्ट किया कि आपदा के समय ‘रिस्पांस टाइम’ (घटनास्थल पर पहुँचने का समय) सबसे महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
1. आपदा प्रबंधन: 24×7 अलर्ट और त्वरित कार्रवाई
समन्वय: एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), पुलिस और जिला प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने और आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।
पूर्व तैनाती: संवेदनशील इलाकों और आपदा संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों की पहले से ही तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
संसाधन: हाई कैपेसिटी पंप, मोटर बोट, लाइफ जैकेट और संचार उपकरणों को हर समय कार्यशील स्थिति में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
2. स्वास्थ्य सेवाएं: गर्भवती महिलाओं और पशुधन पर विशेष ध्यान
मेडिकल पोस्ट: चारधाम मार्गों पर पर्याप्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और दवाओं के साथ मेडिकल पोस्ट स्थापित किए जाएंगे।
गर्भवती महिलाओं का डेटा: सड़क बंद होने या आपदा की स्थिति को देखते हुए गर्भवती महिलाओं का डेटा पहले से संकलित कर उनके लिए चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष व्यवस्था की जाएगी।
पशुधन सुरक्षा: पशुओं के बचाव और उपचार के लिए विशेष क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया जाएगा।
3. जलभराव और बाढ़ नियंत्रण
नालों की सफाई: शहरी क्षेत्रों में जलभराव रोकने के लिए मानसून शुरू होने से पहले कम से कम दो बार बड़े नालों और नालियों की सफाई का अभियान चलाया जाएगा।
ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन: नदियों में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए सिल्ट (मिट्टी) निकालने और चैनलाइजेशन का कार्य मानसून से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
4. ट्रेकर्स के लिए नई नीति और सुरक्षा
राज्य में बढ़ती ट्रेकिंग गतिविधियों को देखते हुए मंत्री ने नई ट्रेकिंग पॉलिसी और एसओपी (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं:
ट्रेकर्स का पूरा रिकॉर्ड यूएसडीएमए के पास अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए।
ट्रेकर्स के पास जीपीएस (GPS) और बेहतर संचार उपकरण होना जरूरी होगा ताकि आपात स्थिति में उनकी लोकेशन ट्रेस की जा सके।
निष्कर्ष:
मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि उत्तराखंड के लिए मानसून का समय बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। सरकार का लक्ष्य शून्य जनहानि (Zero Casualty) और सुरक्षित चारधाम यात्रा सुनिश्चित करना है।
