अमेरिका में जन्मजात नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रंप का कार्यकारी आदेश रद्द
अमेरिका में जन्मजात नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रंप का कार्यकारी आदेश रद्द
वाशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश को 6-3 के बहुमत से रद्द कर दिया, जिसमें अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे अप्रवासियों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता देने से इनकार करने का प्रावधान था।
फैसले की मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट ने 14वें संशोधन के नागरिकता खंड (Citizenship Clause) की व्याख्या करते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता मिलनी चाहिए, भले ही उनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक न हों या स्थायी निवासी (Green Card holders) न हों।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखते हुए कहा, “नागरिकता अधिकारों का अधिकार है… 14वें संशोधन के निर्माताओं ने इस वादे को इस भूमि के हर स्वतंत्र व्यक्ति तक बढ़ाया था। हम आज भी उस वादे को निभा रहे हैं।”
ट्रंप का कार्यकारी आदेश (Executive Order 14160) कभी लागू ही नहीं हुआ था, क्योंकि निचली अदालतों ने इसे पहले ही रोक दिया था।
ट्रंप के आदेश में क्या प्रतिबंध लगाए गए थे?
ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को पद संभालते ही यह आदेश जारी किया था, जिसका नाम था “Protecting the Meaning and Value of American Citizenship”। इसमें निम्नलिखित प्रतिबंध थे:
नागरिकता केवल तभी, अगर बच्चे का कम से कम एक माता-पिता अमेरिकी नागरिक हो या स्थायी निवासी (Lawful Permanent Resident) हो।
अवैध अप्रवासियों (Undocumented Immigrants), अस्थायी वीजा पर रहने वालों या अन्य गैर-नागरिकों के बच्चों को जन्मजात नागरिकता से वंचित करना।
यह 14वें संशोधन की पारंपरिक व्याख्या को बदलने की कोशिश थी, जो 1898 के United States v. Wong Kim Ark मामले में स्थापित हुई थी।
पृष्ठभूमि और प्रतिक्रियाएं
यह फैसला ट्रंप प्रशासन की सख्त अप्रवासन नीति को बड़ा झटका माना जा रहा है। ट्रंप ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “दुखद” है और कांग्रेस से कानून बनाकर इसे बदलने की अपील की।
विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों (जैसे ACLU) ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों की जीत बताया।
नोट: यह फैसला Trump v. Barbara मामले में आया, जिसमें अप्रभावित बच्चों की ओर से याचिका दायर की गई थी।
