अन्तर्राष्ट्रीय

किम जोंग उन का नया ‘डेथ वारंट’: उत्तर कोरिया ने बदला संविधान, नेतृत्व पर खतरा मंडराते ही होगा ‘ऑटोमैटिक’ परमाणु हमला

किम जोंग उन का नया ‘डेथ वारंट’: उत्तर कोरिया ने बदला संविधान, नेतृत्व पर खतरा मंडराते ही होगा ‘ऑटोमैटिक’ परमाणु हमला

​प्योंगयांग: उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी सुरक्षा और देश की परमाणु नीति को लेकर एक ऐसा खौफनाक फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया, खासकर अमेरिका और दक्षिण कोरिया की नींद उड़ा दी है। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में संशोधन करते हुए परमाणु हमले की प्रक्रिया को ‘ऑटोमैटिक’ (स्वचालित) कर दिया है।

​इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किम जोंग उन को कुछ होता है या उनके नेतृत्व पर कोई हमला होता है, तो उत्तर कोरिया की मिसाइलें बिना किसी मानवीय आदेश के खुद-ब-खुद दुश्मन देशों पर गिरना शुरू हो जाएंगी।

​नया कानून: ‘कमांड एंड कंट्रोल’ सिस्टम हुआ एक्टिव

​उत्तर कोरिया की संसद (सुप्रीम पीपुल्स असेंबली) में पारित किए गए इस नए कानून के तहत परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अब ‘अपरिवर्तनीय’ (Irreversible) बना दिया गया है। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

​नेतृत्व पर हमला यानी सर्वनाश: नए संविधान के मुताबिक, यदि उत्तर कोरिया के ‘कमांड एंड कंट्रोल’ सिस्टम (किम जोंग उन और शीर्ष नेतृत्व) पर कोई दुश्मन देश हमला करता है या उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता है, तो देश का न्यूक्लियर सिस्टम फौरन ‘प्री-इम्पटिव स्ट्राइक’ (Pre-emptive Strike) मोड में चला जाएगा।

​हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म: पहले परमाणु हमले के लिए सर्वोच्च नेता के सीधे आदेश की आवश्यकता होती थी, लेकिन अब सिस्टम को इस तरह प्रोग्राम किया गया है कि नेतृत्व के निष्क्रिय होते ही मिसाइलें दाग दी जाएंगी।

​बातचीत के रास्ते बंद: किम जोंग उन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब परमाणु हथियारों को लेकर कोई मोलभाव या बातचीत नहीं होगी। उन्होंने अपनी परमाणु शक्ति को देश की ‘गरिमा’ और ‘अस्तित्व’ से जोड़ दिया है।

​आखिर किम जोंग उन ने ऐसा क्यों किया?

​विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया की ‘डीकैपिटेशन स्ट्राइक’ (Decapitation Strike) रणनीति का जवाब है।

​सुरक्षा कवच: दक्षिण कोरिया अक्सर प्योंगयांग के नेतृत्व को खत्म करने की योजना (Kill Chain) पर चर्चा करता रहता है। किम जोंग उन ने इस नए कानून के जरिए यह संदेश दिया है कि अगर उन्हें मारने की कोशिश की गई, तो पूरा क्षेत्र परमाणु आग में झुलस जाएगा।

​अमेरिका को चेतावनी: उत्तर कोरिया अब खुद को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है, जिसे कोई भी देश सैन्य बल के जरिए डरा नहीं सकता।

​दुनिया के लिए क्यों है यह बड़ी चिंता?

​यह बदलाव बेहद खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि ‘ऑटोमैटिक’ शब्द का मतलब है कि अब मानवीय सूझबूझ की जगह मशीनी प्रक्रिया ले लेगी। अगर कभी कोई तकनीकी खराबी या गलत रडार सिग्नल मिलता है, तो बिना किसी पुष्टि के परमाणु युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ गया है।

​निष्कर्ष:

किम जोंग उन ने अपने इस नए संविधान के जरिए यह साफ कर दिया है कि वे अपनी सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अब उत्तर कोरिया की परमाणु नीति ‘रक्षात्मक’ से हटकर पूरी तरह ‘आक्रामक’ और ‘स्वचालित’ हो चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *