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​पुतिन का विजय दिवस संबोधन: ‘विजय रूस की थी और हमेशा रहेगी’, नाटो और यूक्रेन पर भी साधा निशाना

रूस के मॉस्को में ‘विजय दिवस’ (Victory Day) के अवसर पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश को संबोधित किया। पुतिन का यह भाषण न केवल ऐतिहासिक गौरव पर केंद्रित रहा, बल्कि इसमें वर्तमान युद्ध और तकनीकी प्रगति का भी कड़ा संदेश छिपा था। यहाँ इस विशेष संबोधन पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

​पुतिन का विजय दिवस संबोधन: ‘विजय रूस की थी और हमेशा रहेगी’, नाटो और यूक्रेन पर भी साधा निशाना

​मॉस्को (रूस): रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रेड स्क्वायर पर आयोजित भव्य विजय दिवस परेड में भाग लेते हुए इसे देश का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व बताया। पुतिन ने द्वितीय विश्व युद्ध (महान देशभक्ति युद्ध) के नायकों को याद करते हुए वर्तमान में जारी ‘विशेष सैन्य अभियान’ (यूक्रेन युद्ध) के सैनिकों का भी हौसला बढ़ाया।

​इतिहास के नायकों को नमन

​पुतिन ने अपने संबोधन में सोवियत संघ के सैनिकों के अद्वितीय साहस और बलिदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

​अटूट विरासत: रूस अपने उन पूर्वजों का सम्मान करता है जिन्होंने नाजीवाद को पराजित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह स्मृति बच्चों और पोते-पोतियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी।

​बलिदान को याद किया: उन्होंने लेनिनग्राद की घेराबंदी में भूख से मरने वालों और यातनाएं सहने वाले शहीदों को नमन किया।

​एकता ही शक्ति: पुतिन ने जोर देकर कहा कि मातृभूमि के प्रति निष्ठा ही वह सर्वोच्च सत्य है जिसने लाखों लोगों को एकजुट किया और शत्रु के सामने एक दीवार बनकर खड़ा किया।

​रूसी वैज्ञानिकों और आधुनिक हथियारों का दम

​राष्ट्रपति ने रूस की सैन्य शक्ति के पीछे खड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने बताया कि:

​अद्वितीय हथियार प्रणालियाँ: रूसी डिजाइनर और वैज्ञानिक आधुनिक युद्ध के अनुभवों का लाभ उठाते हुए ऐसी उन्नत हथियार प्रणालियाँ बना रहे हैं जिनका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है।

​बड़े पैमाने पर उत्पादन: इन घातक और आधुनिक हथियारों का अब बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया गया है ताकि सेना को और अधिक शक्तिशाली बनाया जा सके।

​विशेष सैन्य अभियान और नाटो पर प्रहार

​पुतिन ने वर्तमान युद्ध की स्थिति को सीधे तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध के संघर्षों से जोड़ते हुए कहा:

​नाटो का मुकाबला: आज के ‘विशेष सैन्य अभियान’ के नायक नाटो (NATO) द्वारा समर्थित और सशस्त्र आक्रामक बल का सामना कर रहे हैं।

​विजय का साझा लक्ष्य: पुतिन के अनुसार, विजय केवल युद्ध के मैदान पर ही नहीं, बल्कि घरेलू मोर्चे पर भी हासिल की जा रही है। इसमें डॉक्टर, शिक्षक, पादरी, उद्यमी और कारखाने के श्रमिक—सभी अपना योगदान दे रहे हैं।

​प्रेरणा: उन्होंने कहा कि 1945 की विजयी पीढ़ी का पराक्रम ही आज के सैनिकों को यूक्रेन के मोर्चे पर लड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

​निष्कर्ष

​राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट संदेश दिया कि रूस अपनी संप्रभुता और गौरव के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है। उनके भाषण में ‘राष्ट्रीय एकता’ और ‘आधुनिक सैन्य शक्ति’ पर सबसे अधिक जोर दिया गया, जिससे यह साफ होता है कि रूस अपने लक्ष्यों से पीछे हटने वाला नहीं है।

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