प्रोजेक्ट फ्रीडम: सऊदी अरब और कुवैत के समर्थन से ट्रंप के अभियान को मिली नई संजीवनी
प्रोजेक्ट फ्रीडम: सऊदी अरब और कुवैत के समर्थन से ट्रंप के अभियान को मिली नई संजीवनी
खाड़ी क्षेत्र से अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर सामने आई है। सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल की अनुमति दोबारा दे दी है। इस फैसले से क्षेत्र में तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य योजनाओं को बड़ी मजबूती मिली है।
क्या है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से एक व्यापक नौसैनिक अभियान की घोषणा की है। इस मिशन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना।
ईरान की ओर से संभावित खतरों को रोकना।
वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्ग को निर्बाध बनाए रखना।
मिशन में क्यों आई थी रुकावट?
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, जब ट्रंप ने इस मिशन की शुरुआत की, तो उन्हें खाड़ी देशों के सहयोग की आवश्यकता थी। शुरुआती दौर में सऊदी अरब ने अपने एयरबेस और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इसके चलते:
अमेरिका को यह महत्वपूर्ण अभियान शुरू होने के मात्र 36 घंटे बाद ही रोकना पड़ा।
वाशिंगटन और रियाद के बीच सुरक्षा समझौते (Security Pact) पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
राष्ट्रपति ट्रंप और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के बीच फोन पर हुई बातचीत भी बेनतीजा रही थी।
सऊदी और कुवैत के रुख में बदलाव के मायने
अब सऊदी अरब और कुवैत ने अपने रुख में नरमी लाते हुए अमेरिकी सेना को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब, ट्रंप प्रशासन के साथ अपने दीर्घकालिक रक्षा संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहता था।
ताजा अपडेट्स:
पेंटागन की तैयारी: अमेरिकी रक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि सैन्य ठिकानों की अनुमति मिलने के बाद ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को इसी हफ्ते दोबारा लॉन्च किया जा सकता है।
सैन्य सुरक्षा: अब अमेरिकी नौसेना और वायुसेना मिलकर व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराएंगी।
निष्कर्ष: खाड़ी देशों का यह समर्थन न केवल ट्रंप की विदेश नीति की सफलता है, बल्कि यह क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
