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​होर्मुज बना ‘टोल रोड’: ईरान ने बनाई PGSA एजेंसी, अब हर जहाज को देना होगा करोड़ों का टैक्स!

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना शिकंजा कसते हुए एक नई सरकारी एजेंसी का गठन किया है, जो अब हर गुजरने वाले जहाज से ‘टोल’ वसूलेगी।

​होर्मुज बना ‘टोल रोड’: ईरान ने बनाई PGSA एजेंसी, अब हर जहाज को देना होगा करोड़ों का टैक्स!

​तेहरान / दुबई: वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवन रेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब ईरान ने अपना ‘एकाधिकार’ घोषित कर दिया है। ईरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) नाम की एक एजेंसी बनाई है। यह एजेंसी अब अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले हर व्यापारिक जहाज की जांच करेगी और उनसे ‘ट्रांजिट फीस’ यानी टोल वसूलेगी।

​क्या है नई व्यवस्था और वसूली का रेट?

​ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते को एक ‘सॉवरेन टोल रोड’ में बदल दिया है। यहाँ मुख्य नियम इस प्रकार लागू किए गए हैं:

​भारी भरकम फीस: रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बड़े तेल टैंकर (VLCC) से 20 लाख डॉलर (लगभग 16.7 करोड़ रुपये) तक की वसूली की जा रही है। अन्य जहाजों के लिए फीस उनकी माल ढोने की क्षमता और राष्ट्रीयता के आधार पर तय की गई है।

​भुगतान का तरीका: ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए यह भुगतान केवल चीनी युआन (Yuan) या डिजिटल संपत्तियों (Cryptocurrency) में स्वीकार कर रहा है।

​क्लियरेंस कोड: जो जहाज टोल का भुगतान करेंगे और अपनी पूरी जानकारी (Vessel Information Declaration) ईमेल के जरिए PGSA को देंगे, उन्हें एक विशेष ‘VHF पासकोड’ दिया जाएगा। इसके बाद ही ईरान की नौसेना (IRGC) उन्हें सुरक्षित रास्ता देगी।

​क्यों लिया ईरान ने यह फैसला?

​ईरान का तर्क है कि वह यह कदम अपनी सुरक्षा और हाल के युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उठा रहा है।

​युद्ध का हर्जाना: ईरान ने इसे ‘वॉर टैक्स’ का नाम दिया है और कहा है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के कारण हुए नुकसान की भरपाई इसी टोल से की जाएगी।

​रणनीतिक नियंत्रण: दुनिया का 20% तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। इस पर नियंत्रण पाकर ईरान वैश्विक ताकतों (विशेषकर अमेरिका) पर दबाव बनाना चाहता है।

​दुनिया भर में खलबली: क्या होगा असर?

​इस कदम ने पूरी दुनिया की समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक नियमों को हिला दिया है:

​अमेरिका की प्रतिक्रिया: अमेरिका ने इसे “अवैध” और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) का खुला उल्लंघन बताया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इसे समुद्री डकैती और रिश्वतखोरी का आधिकारिक रूप करार दिया है।

​तेल की कीमतों में उछाल: होर्मुज के रास्ते पर अतिरिक्त खर्च और अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं।

​शिपिंग कंपनियों का संकट: करीब 1,500 जहाज वर्तमान में फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं या लंगर डाले खड़े हैं, क्योंकि वे ईरान को भुगतान करने और अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) के बीच फंसे हुए हैं।

​भारत के लिए चिंता की बात

​भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है। यदि यह टोल व्यवस्था लंबे समय तक चलती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। साथ ही, खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और वहां से आने वाले सामान की लागत पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।

​विशेषज्ञों का मत: यह आधुनिक इतिहास में पहली बार है जब किसी देश ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को पूरी तरह से ‘प्राइवेट टोल गेट’ में बदल दिया है। यह मामला अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पहुँचने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

​क्या आपको लगता है कि ईरान का यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट को एक नए युद्ध की ओर धकेल देगा?

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