चेन्नई राजभवन में सस्पेंस: विजय के समर्थन में आए धुर विरोधी प्रकाश राज, राज्यपाल के रुख को बताया ‘घिनौना’
तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त ‘सिनेमा बनाम संविधान’ की एक दिलचस्प जंग देखने को मिल रही है। एक ओर सुपरस्टार विजय अपनी पार्टी TVK के साथ सत्ता की दहलीज पर खड़े हैं, तो दूसरी ओर राजभवन के कड़े रुख ने पेंच फंसा दिया है। इस पूरे ड्रामे में सबसे चौंकाने वाला मोड़ अभिनेता प्रकाश राज का स्टैंड है, जो अक्सर विजय की राजनीतिक एंट्री के आलोचक रहे हैं।
चेन्नई राजभवन में सस्पेंस: विजय के समर्थन में आए धुर विरोधी प्रकाश राज, राज्यपाल के रुख को बताया ‘घिनौना’
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जहाँ एक तरफ डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तेज है, वहीं राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ द्वारा विजय (TVK प्रमुख) को बहुमत साबित करने की चुनौती देने पर विवाद छिड़ गया है।
प्रकाश राज का ‘यू-टर्न’: मतभेद किनारे, लोकतंत्र पहले
पर्दे पर ‘घिल्ली’ और ‘पोक्किरी’ जैसी फिल्मों में विजय के कट्टर दुश्मन की भूमिका निभाने वाले प्रकाश राज असल जिंदगी में भी विजय की राजनीति के आलोचक रहे हैं। उन्होंने हमेशा कहा है कि केवल ‘फैन बेस’ या ‘प्रसिद्धि’ सुशासन की गारंटी नहीं हो सकती। लेकिन राज्यपाल के हालिया फैसलों ने उन्हें विजय के पक्ष में खड़ा कर दिया है।
प्रकाश राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ा प्रहार करते हुए लिखा:
”राज्यपाल का यह व्यवहार घिनौना, अस्वीकार्य और असंवैधानिक है। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं… लेकिन विजय को जनादेश मिला है। उन्हें सदन के पटल पर अपना दावा पेश करने का अधिकार मिलना चाहिए।”
राज्यपाल पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं। इस मुद्दे पर प्रकाश राज ने राष्ट्रीय पत्रकार राजदीप सरदेसाई के विचारों का भी समर्थन किया।
मुख्य सवाल: जब कोई अन्य दल या गठबंधन सरकार बनाने का स्पष्ट दावा पेश नहीं कर रहा है, तो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी TVK के नेता विजय को मौका क्यों नहीं दिया जा रहा?
आरोप: विपक्ष और कई विश्लेषकों का आरोप है कि गोवा से ताल्लुक रखने वाले और भाजपा की पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रख रहे हैं।
विजय की अगली चाल
ताजा जानकारी के अनुसार, सुपरस्टार विजय हार मानने के मूड में नहीं हैं। वे जल्द ही राज्यपाल से दोबारा मुलाकात करने वाले हैं। इस बार वे न केवल समर्थन करने वाले विधायकों की सूची सौंपेंगे, बल्कि यह भी साबित करने की कोशिश करेंगे कि उनके पास राज्य चलाने के लिए आवश्यक संख्या बल और विजन दोनों मौजूद हैं।
चेन्नई का ‘पॉलिटिकल थ्रिलर’
चेन्नई में चल रहा यह खेल अब केवल एक राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं रह गया है। यह ‘जनादेश बनाम राज्यपाल की शक्ति’ की एक बड़ी बहस में तब्दील हो गया है। एक तरफ जहां समाज ‘प्रशंसक-संचालित’ राजनीति की ओर बढ़ रहा है (जैसा कि प्रकाश राज ने पहले कहा था), वहीं दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता दांव पर लगी है।
राजभवन के भीतर की हलचल और विजय का अगला कदम यह तय करेगा कि क्या तमिलनाडु को एक ‘फिल्मी सुपरस्टार’ मुख्यमंत्री के रूप में मिलेगा या राज्य एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के भंवर में फंस जाएगा।
