लोकतंत्र को मजबूती देने की पहल: सर्बिया दौरे पर उत्तराखंड का प्रतिनिधिमंडल, निर्वाचन प्रक्रियाओं का किया गहन अध्ययन
लोकतंत्र को मजबूती देने की पहल: सर्बिया दौरे पर उत्तराखंड का प्रतिनिधिमंडल, निर्वाचन प्रक्रियाओं का किया गहन अध्ययन
बेलग्रेड/देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग की विशेष पहल पर उत्तराखंड का एक उच्चस्तरीय 5-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूरोप के सर्बिया गणराज्य के दौरे पर है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम के नेतृत्व में यह दल सर्बिया की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं, चुनाव प्रबंधन और मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है।
नोवी साद प्रांत की विधानसभा का भ्रमण
दौरे के महत्वपूर्ण चरण में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को सर्बिया के नोवी साद प्रांत की विधानसभा का भ्रमण किया। यहाँ भारतीय दल का स्वागत विधानसभा की चेयरमैन सुश्री दीना वुचिनिच द्वारा किया गया। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करने और निर्वाचन प्रक्रियाओं में तकनीक व प्रबंधन के सहयोग पर चर्चा की गई।
सर्बियाई निर्वाचन प्रणाली पर शोध और चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने सर्बिया के प्रांतीय निर्वाचन आयोग के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सर्बिया की विशिष्ट निर्वाचन प्रणाली, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और चुनाव के दौरान होने वाले प्रबंधन को समझना था। सीईओ डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि इस दौरे से प्राप्त अनुभव भविष्य में उत्तराखंड और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक सशक्त और आधुनिक बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
प्रमुख उपस्थिति
अध्ययन भ्रमण के दौरान भारतीय दल के साथ सर्बिया में भारत के राजदूत श्री अभिषेक शुक्ला भी उपस्थित रहे, जिन्होंने भारत-सर्बिया संबंधों के बीच इस प्रकार के शैक्षणिक आदान-प्रदान को मील का पत्थर बताया।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य
इस महत्वपूर्ण दल में प्रशासन के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि अध्ययन व्यापक हो सके:
डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम (मुख्य निर्वाचन अधिकारी)
डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे (अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी)
नितिका खण्डेलवाल (जिलाधिकारी, टिहरी)
गौरव पांडे (ईआरओ, काशीपुर)
मोहम्मद कलीम (बीएलओ)
यह अध्ययन दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्वाचन प्रबंधन के श्रेष्ठ अनुभवों (Best Practices) को साझा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर (BLO) से लेकर राज्य स्तर (CEO) तक की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है।
