उत्तराखंड

​जनगणना 2027: उत्तराखंड शासन ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश; सहयोग न करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

जनगणना 2027: उत्तराखंड शासन ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश; सहयोग न करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

​देहरादून। उत्तराखंड में आगामी ‘जनगणना 2027’ के सफल और सुचारु संचालन के लिए शासन ने कमर कस ली है। जनगणना सचिव श्री दीपक कुमार द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना न केवल एक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, बल्कि यह राज्य के भविष्य के विकास, नीति निर्धारण और परिसीमन का मुख्य आधार है। शासन ने आम जनता से इस राष्ट्रीय कार्य में पूर्ण सहयोग और सटीक जानकारी देने की अपील की है।

​डेटा की गोपनीयता और सामाजिक परंपराओं का सम्मान

​निर्देशों में नागरिकों की गोपनीयता और सामाजिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा गया है। नियमों के अनुसार:

​अनिवार्यता: प्रत्येक नागरिक का यह वैधानिक दायित्व है कि वह जनगणना अधिकारी द्वारा पूछे गए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित प्रश्नों का सही उत्तर दे।

​विशेष छूट: सामाजिक परंपराओं को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार, कोई महिला अपने पति या मृत पति का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं होगी।

​गोपनीयता: जनगणना के दौरान एकत्र किया गया डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। किसी भी बाहरी व्यक्ति या संस्था को जनगणना रजिस्टर या अभिलेखों के निरीक्षण की अनुमति नहीं होगी।

​परिसर में प्रवेश और सहयोग अनिवार्य

​शासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक गृहस्वामी या अधिभोगी को जनगणना अधिकारियों को अपने परिसर में प्रवेश की अनुमति देनी होगी। साथ ही, जनगणना कार्य के लिए घरों पर लगाए जाने वाले विशेष चिन्ह, अक्षर या संख्यांक (Numbering) को अंकित करने में सहयोग करना अनिवार्य होगा।

​नियम उल्लंघन पर होगी विधिक कार्यवाही

​जनगणना कार्य में बाधा डालने वालों के लिए सख्त चेतावनी जारी की गई है। यदि कोई व्यक्ति:

​जानबूझकर गलत जानकारी देता है।

​जनगणना अधिकारी को परिसर में प्रवेश करने से रोकता है।

​घर पर अंकित किए गए जनगणना चिन्हों या नंबरों को हटाता या क्षति पहुंचाता है।

तो ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध जनगणना अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के तहत विधिक कार्यवाही और दण्ड सुनिश्चित किया जाएगा।

​क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?

​सचिव दीपक कुमार ने बताया कि इस डेटा का उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आर्थिक योजनाओं के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा, यह डेटा विधानसभा, पंचायत और स्थानीय निकायों के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन तथा आरक्षण के निर्धारण में प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करता है।

​शासन ने राज्य के सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ‘प्रगति’ और ‘विकास’ के इस अभियान में भागीदार बनें और जनगणना अधिकारियों को सही तथ्य उपलब्ध कराएं।

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