उत्तराखंड

एक्सप्रेसवे का ‘साइड इफेक्ट’: हरिद्वार के पर्यटन कारोबार में 40% की भारी गिरावट, खाली पड़े हैं होटल और ढाबे

एक्सप्रेसवे का ‘साइड इफेक्ट’: हरिद्वार के पर्यटन कारोबार में 40% की भारी गिरावट, खाली पड़े हैं होटल और ढाबे

​हरिद्वार: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने पूरे शबाब पर है और प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन ‘चारधाम के प्रवेश द्वार’ कहे जाने वाले हरिद्वार से इस बार परेशान करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। धर्मनगरी का होटल, ढाबा और ट्रैवल कारोबार इस सीजन में करीब 40 फीसदी तक सिमट गया है। स्थानीय कारोबारी इसके लिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को मुख्य कारण मान रहे हैं।

​क्यों सूनी पड़ी है धर्मनगरी?

​नया एक्सप्रेसवे खुलने से दिल्ली से देहरादून का सफर अब मात्र 2.5 से 3 घंटे का रह गया है। इसका सीधा असर हरिद्वार के व्यापार पर पड़ा है:

​बाईपास हो रहा हरिद्वार: दिल्ली, नोएडा, पंजाब और हरियाणा से आने वाले श्रद्धालु अब समय बचाने के लिए पुराने नेशनल हाईवे के बजाय सीधे एक्सप्रेसवे का चुनाव कर रहे हैं। इससे वे हरिद्वार रुके बिना सीधे देहरादून या चारधाम की ओर निकल रहे हैं।

​होटल बुकिंग में गिरावट: होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा के अनुसार, शहर के 40 प्रतिशत होटल खाली पड़े हैं। यात्रियों की कमी के कारण होटलों का संचालन खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

​ट्रैवल और ढाबा कारोबार ठप: हाईवे किनारे चलने वाले ढाबों पर रौनक गायब है। ट्रैवल कारोबारियों को अप्रैल माह में कोई एडवांस बुकिंग नहीं मिली है, और पूछताछ (इन्क्वायरी) भी बहुत कम है।

​वैश्विक और आर्थिक कारणों की मार

​कारोबारियों का कहना है कि संकट केवल एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं है:

​खाड़ी युद्ध का असर: खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण गैस और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है, जिससे लंबी दूरी के यात्री यात्रा टाल रहे हैं।

​टैक्स का बोझ: होटल कारोबारी अखिलेश चौहान ने बताया कि कारोबार घटने के बावजूद बिजली, पानी और सीवर टैक्स की दरें यथावत हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

​सरकार से राहत की गुहार

​हरिद्वार के व्यापारिक संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं ताकि इस संकट से उबरा जा सके:

​टैक्स में छूट: कारोबारियों ने बिजली, पानी और सीवर टैक्स की दरों में रियायत की मांग की है।

​चारधाम रूट का हिस्सा: होटल एसोसिएशन का आरोप है कि हरिद्वार को आधिकारिक चारधाम यात्रा रूट में उस तरह प्राथमिकता नहीं दी जा रही जैसी पहले दी जाती थी।

​अनिवार्य ठहराव की अपील: व्यापारियों का सुझाव है कि चारधाम जाने वाले यात्रियों को गंगा स्नान और हरिद्वार दर्शन के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार को विशेष प्रयास करने चाहिए।

​निष्कर्ष: जहाँ एक ओर एक्सप्रेसवे ने सफर को सुगम और तेज बनाया है, वहीं हरिद्वार जैसे पड़ाव वाले शहरों के लिए यह अस्तित्व का संकट खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि सरकार विकास और स्थानीय व्यापार के बीच संतुलन बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।

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