उत्तराखंड

ड्रग्स फ्री उत्तराखंड: अब तस्करों के नेटवर्क पर होगा प्रहार; अगले 15 दिनों में तैयार होगा एक साल का मास्टर प्लान

ड्रग्स फ्री उत्तराखंड: अब तस्करों के नेटवर्क पर होगा प्रहार; अगले 15 दिनों में तैयार होगा एक साल का मास्टर प्लान

​देहरादून | मुख्य संवाददाता

​उत्तराखंड को नशे के जाल से मुक्त कराने के लिए प्रदेश सरकार ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि केवल छोटे तस्करों की धरपकड़ से काम नहीं चलेगा, बल्कि ड्रग्स के पूरे सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करना होगा। सरकार अब कानून व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य और सामाजिक सुधारों के ‘बहु-स्तरीय मॉडल’ पर काम करेगी।

​अगले 15 दिनों में ‘एक्शन प्लान’ तैयार करने के निर्देश

​बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य और जनपद स्तर की चुनौतियों को देखते हुए अलग-अलग रणनीति बनाई जाएगी। अगले 15 दिनों के भीतर एक साल का विस्तृत रोडमैप तैयार होगा। इसमें कानून प्रवर्तन, अपराधियों को सजा दिलाने और नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के पुनर्वास (Rehabilitation) को प्राथमिकता दी जाएगी।

​शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर दायरे में होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​युवाओं और स्कूली बच्चों में बढ़ते नशे के चलन को देखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है:

​एंटी-ड्रग क्लब: सभी स्कूलों और कॉलेजों में अनिवार्य रूप से एंटी-ड्रग क्लब बनाए जाएंगे।

​नो-नशा जोन: शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

​जागरूकता: नियमित तौर पर कैंपस में अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए जाएंगे ताकि छात्र इसके खतरों को समझ सकें।

​सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित होंगे बेड, प्राइवेट सेंटरों की होगी जांच

​नशामुक्ति के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी है:

​जिला अस्पतालों में बेड: हर जिले के कम से कम एक सरकारी अस्पताल में नशामुक्ति के लिए बेड आरक्षित किए जाएंगे।

​निजी केंद्रों पर शिकंजा: मानकों का उल्लंघन करने वाले निजी नशामुक्ति केंद्रों (De-addiction Centers) की जांच होगी और गड़बड़ी मिलने पर उन्हें बंद किया जाएगा।

​ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती: गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में अलग-अलग ड्रग इंस्पेक्टर तैनात होंगे ताकि जमीनी कार्रवाई की निगरानी और गुणवत्ता में सुधार हो सके।

​नेटवर्क तोड़ने पर फोकस, होगा बड़ा सर्वे

​बैठक में स्वीकार किया गया कि जब तक सप्लाई चेन नहीं टूटेगी, नशा कम नहीं होगा। इसके लिए एजेंसियों को ‘बड़ी मछलियों’ (सप्लाई नेटवर्क के आकाओं) तक पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, राज्य में नशे के फैलाव की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एक विस्तृत सर्वे कराया जाएगा, ताकि डेटा के आधार पर लक्षित कार्रवाई (Targeted Action) की जा सके।

​मुख्य बिंदु: >  न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाकर तस्करों को सख्त सजा दिलाना।

​सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने के लिए एजेंसियों का संयुक्त अभियान।

​नशे को सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती मानकर लड़ना।

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