Share Market Bloodbath: कोहराम के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 940 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला
Share Market Bloodbath: कोहराम के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 940 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला
मुंबई | बिजनेस डेस्क
ग्लोबल मार्केट से मिल रहे बेहद नकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में ‘ब्लैक थर्सडे’ जैसा नजारा देखने को मिला। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली (Sell-off) शुरू हो गई, जिससे कुछ ही मिनटों में निवेशकों के अरबों रुपये स्वाहा हो गए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों ने अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं।
बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स-निफ्टी धराशायी
शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति बेहद नाजुक नजर आई:
BSE सेंसेक्स: करीब 940 अंक लुढ़क कर 76,556 के स्तर पर आ गया।
NSE निफ्टी: 275 अंकों की भारी गिरावट के साथ 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसलकर 23,902 पर ट्रेड करता दिखा।
ओपनिंग: बाजार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई थी। सेंसेक्स 678 अंक नीचे खुला था, लेकिन देखते ही देखते गिरावट गहराती चली गई।
गिरावट के 3 मुख्य कारण
1. अमेरिका-ईरान युद्ध का तनाव:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की आशंका ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है। शांति की कोई उम्मीद न दिखने से जोखिम वाले एसेट्स (शेयर) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (सोना/डॉलर) की ओर जा रहा है।
2. कच्चे तेल में उबाल ($120 के पार):
तेल की सप्लाई पर संकट मंडराने की वजह से ब्रेंट क्रूड $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग भारतीय इकोनॉमी और शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है।
3. रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया:
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.126 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। आज सुबह इसमें 20 पैसे की भारी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे विदेशी निवेशकों (FPIs) के बीच घबराहट बढ़ गई है।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल
भारतीय बाजार अकेले इस गिरावट का शिकार नहीं हैं, बल्कि पूरे एशिया में सन्नाटा पसरा हुआ है:
जापान (Nikkei 225): छुट्टियों के बाद खुलते ही 1.3% टूट गया।
हॉन्गकॉन्ग (Hang Seng): 1.2% की कमजोरी दर्ज की गई।
चीन और दक्षिण कोरिया: यहां के बाजारों में भी लाल निशान में कारोबार हो रहा है।
अमेरिकी फेड का फैसला: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने और भविष्य में कड़े रुख के संकेतों ने भी बाजार का मूड बिगाड़ा है।
बाजार विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और भू-राजनीतिक मोर्चे पर कोई सकारात्मक खबर नहीं आती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को फिलहाल संभलकर ट्रेड करने और ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
