Tuesday, June 30, 2026
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उत्तराखंड

चारधाम यात्रा: खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, प्रदेशभर में सघन चेकिंग अभियान शुरू

चारधाम यात्रा: खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, प्रदेशभर में सघन चेकिंग अभियान शुरू

​देहरादून: चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के आगाज़ के साथ ही उत्तराखंड शासन यात्रियों के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर पूरी तरह ‘अलर्ट मोड’ पर है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देशों के बाद राज्यभर में विशेष निगरानी अभियान छेड़ दिया है। अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में विभाग की टीमें होटल, ढाबों और फल-सब्जी मंडियों में औचक निरीक्षण कर रही हैं।

​यात्रा मार्गों पर विशेष नजर

​लाखों श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए चारधाम रूट पर स्थित रेस्टोरेंट्स और अस्थायी फूड स्टॉल्स की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का मुख्य फोकस साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता और वैध लाइसेंसिंग पर है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ मौके पर ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​केमिकल से पकाए जा रहे फलों पर प्रहार: 33 सैंपल लिए गए

​मंगलवार, 28 अप्रैल को विभाग ने फलों और सब्जियों में कीटनाशकों (Pesticides) और कृत्रिम रूप से पकाने वाले रसायनों की जांच के लिए प्रदेशव्यापी अभियान चलाया। इस दौरान कुल 33 सैंपल एकत्र किए गए।

​हरिद्वार (प्रवेश द्वार): सबसे ज्यादा 12 सैंपल लिए गए (तरबूज, खरबूजा, आम, केला, सेब, पपीता, करेला, भिंडी, परवल)।

​नैनीताल: 5 सैंपल (सेब, आम, मौसंबी, टमाटर, लौकी)।

​अन्य जिले: उधम सिंह नगर (3), बागेश्वर (3), पिथौरागढ़ (2), टिहरी (2), अल्मोड़ा (2), रुद्रप्रयाग (2) और चमोली (2) से नमूने लिए गए।

​लैब रिपोर्ट के आधार पर होगी जेल और जुर्माना

​अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि सभी एकत्रित नमूनों को राजकीय प्रयोगशाला भेज दिया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:

​”रिपोर्ट में यदि कीटनाशकों या हानिकारक रसायनों की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई, तो संबंधित व्यापारियों के लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे। साथ ही उन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।”

​आम जनता के लिए एडवाइजरी

​प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे फल खरीदते समय सावधानी बरतें। अत्यधिक चमकदार या अस्वाभाविक रूप से पके हुए फलों के सेवन से बचें, क्योंकि इनमें रसायनों का प्रयोग होने की संभावना अधिक रहती है। किसी भी गड़बड़ी की शिकायत तुरंत विभाग को करने का आग्रह किया गया है।

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