अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय के लिए जंतर-मंतर पर हुंकार
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। रविवार, 26 अप्रैल 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि घटना के तीन साल बीत जाने के बाद भी मुख्य दोषियों और ‘वीआईपी’ चेहरे को बचाया जा रहा है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय के लिए जंतर-मंतर पर हुंकार
1. ‘वीआईपी’ की भूमिका पर सवाल
मंच की सदस्य कमला पंत और निर्मला बिष्ट ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
जांच में ढिलाई: हत्याकांड को 3 साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन “कथित वीआईपी” की भूमिका की अभी तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई है।
नाम का खुलासा: भाजपा के ही एक पूर्व विधायक की पत्नी ने सोशल मीडिया पर इस वीआईपी के नाम का संकेत दिया था, फिर भी मुख्यमंत्री और प्रशासन ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
आरोप: मंच का कहना है कि भाजपा सरकार दोषियों को सजा देने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है।
2. बुलडोजर कार्रवाई और साक्ष्य मिटाने का आरोप
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्विस डंगवाल ने रिजॉर्ट पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए:
जांच की मांग: उन्होंने सवाल किया कि अंकिता के कमरे और रिजॉर्ट पर आनन-फानन में बुलडोजर चलाने का आदेश किसने दिया था?
साक्ष्य मिटाना: मंच का मानना है कि बुलडोजर चलाने का मुख्य उद्देश्य हत्याकांड से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करना था।
3. संयुक्त संघर्ष मंच की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
CBI जांच: पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई (CBI) से कराई जाए।
गिरफ्तारी: केस में शामिल बचे हुए सभी दोषियों और षड्यंत्रकारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
जवाबदेही: रिजॉर्ट तोड़ने का आदेश देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
4. पुलिसिया कार्रवाई और हिरासत
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी देखने को मिली:
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी धीरेंद्र प्रताप को पुलिस ने हिरासत में लिया।
उन्हें लगभग 4 घंटे तक पुलिस हिरासत में रखा गया, जिसका कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया।
निष्कर्ष: अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। ‘न्याय यात्रा मंच’ का स्पष्ट कहना है कि जब तक अंकिता को ‘संपूर्ण न्याय’ नहीं मिलता और उस सफेदपोश वीआईपी का चेहरा सामने नहीं आता, तब तक उनका आंदोलन सड़कों से लेकर सदन तक जारी रहेगा।
