उत्तराखंड

​उत्तराखंड: स्कूलों के समय में बदलाव पर विवाद और शिक्षा मंत्री का रुख

उत्तराखंड में भीषण गर्मी और हीटवेव के प्रकोप को देखते हुए शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों के समय में किए गए बदलाव ने एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ विभाग इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर अभिभावक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

​उत्तराखंड: स्कूलों के समय में बदलाव पर विवाद और शिक्षा मंत्री का रुख

​गर्मी से राहत देने के लिए लागू की गई नई समय सारणी अब बच्चों की सुरक्षा और वन्यजीवों के खतरे के कारण चर्चा का विषय बन गई है।

​1. क्या है नया समय और आदेश?

​शिक्षा विभाग ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए 15 मई तक स्कूलों की समय सारणी बदलने के निर्देश दिए हैं:

​प्रार्थना सभा: सुबह 6:45 बजे।

​स्कूल संचालन: सुबह 7:00 बजे से।

​प्रभावित क्षेत्र: हल्द्वानी, रामनगर और कोटाबाग ब्लॉक के शहरी स्कूलों में इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

​2. अभिभावकों की नाराजगी और सुरक्षा चिंताएं

​ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के अभिभावकों ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनकी मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं:

​तड़के घर से निकलना: स्कूल पहुँचने के लिए बच्चों को सुबह 6:00 बजे या उससे पहले घर छोड़ना होगा।

​वन्यजीवों का खतरा: रामनगर जैसे कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे इलाकों में तड़के जंगली जानवरों (बाघ, हाथी, गुलदार) की सक्रियता अधिक रहती है, जिससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।

​असुविधा: ग्रामीण इलाकों में परिवहन के सीमित साधनों के कारण इतनी जल्दी स्कूल पहुँचना मुश्किल है।

​3. शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान

​रामनगर पहुंचे शिक्षा मंत्री ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा:

​पढ़ाई के घंटे: नई शिक्षा नीति 2020 (NEP) के तहत साल में 240 दिन की पढ़ाई और निश्चित घंटों का पालन अनिवार्य है।

​संतुलन की कोशिश: सरकार बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों को प्राथमिकता दे रही है।

​बैठक का आह्वान: अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों के भारी विरोध को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सोमवार (कल) एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

​4. आगे क्या होगा?

​शिक्षा मंत्री ने संकेत दिया है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर समय सारणी में फिर से संशोधन किया जा सकता है। विभाग अब ऐसी बीच की राह निकालने की कोशिश में है जिससे:

​बच्चों को दोपहर की भीषण लू (Heatwave) से बचाया जा सके।

​तड़के सुबह जंगली जानवरों के खतरे से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

​वार्षिक शिक्षण दिवसों का कोटा भी प्रभावित न हो।

​निष्कर्ष: फिलहाल 7:00 बजे का समय लागू है, लेकिन कल होने वाली बैठक के बाद इसमें बदलाव की पूरी संभावना है। सरकार के लिए बच्चों की “सेहत बनाम सुरक्षा” के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।

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