उत्तराखंड

​दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे: दोपहिया वाहनों को राहत और नए बाईपास का अपडेट

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे परियोजना से जुड़ी ताज़ा जानकारियों ने यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी राहत के संकेत दिए हैं। खासकर मोहंड एलिवेटेड रोड पर दोपहिया वाहनों की अनुमति और ग्रीन फील्ड बाईपास के निर्माण ने इस कॉरिडोर को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

​दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे: दोपहिया वाहनों को राहत और नए बाईपास का अपडेट

​इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य न केवल दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी कम करना है, बल्कि स्थानीय कनेक्टिविटी और पर्यावरण संतुलन को भी बनाए रखना है।

​1. मोहंड एलिवेटेड रोड: दोपहिया वाहनों को मिली हरी झंडी

​सबसे बड़ी राहत की खबर मोहंड सेक्शन से आई है, जहाँ 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर पर दोपहिया (Two-wheeler) और तिपहिया (Three-wheeler) वाहनों के प्रवेश को लेकर संशय बना हुआ था।

​एनएचएआई (NHAI) का फैसला: परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के अनुसार, इस हिस्से पर किसी भी वाहन पर प्रतिबंध नहीं होगा।

​गति सीमा: दोपहिया वाहन 60 किमी/घंटा की निर्धारित गति से इस एलिवेटेड रोड पर चल सकेंगे।

​फायदा: मोहंड का यह क्षेत्र पहले भारी जाम के लिए कुख्यात था, जहाँ अब सफर सुगम और तेज हो गया है।

​2. देहरादून-हिमाचल कनेक्टिविटी: 716 करोड़ का ग्रीन फील्ड बाईपास

​देहरादून में यातायात के दबाव को कम करने के लिए एक नए बाईपास का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है:

​लागत और प्रगति: लगभग 716 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस 12 किमी लंबे बाईपास का 44% कार्य पूरा हो चुका है।

​रूट: यह झाझरा से शुरू होकर पांवटा साहिब-बल्लूपुर (NH-7) हाईवे को आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास जोड़ेगा।

​लक्ष्य: इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

​लाभ: यह बाईपास देहरादून शहर में घुसे बिना भारी वाहनों को डायवर्ट करेगा, जिससे सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र और हिमाचल के पांवटा साहिब की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

​3. पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण

​इस एक्सप्रेस-वे को ‘ईको-फ्रेंडली’ बनाने के लिए विशेष इंजीनियरिंग का सहारा लिया गया है:

​वन्यजीव सुरक्षा: जानवरों के सुरक्षित आवागमन के लिए 350 मीटर लंबा व्हीक्युलर ओवरपास और एक कैटल ओवरपास बनाया जा रहा है।

​छोटे जीव: छोटे जानवरों के लिए विशेष पाइप कल्वर्ट्स का निर्माण किया गया है ताकि वे सड़क के नीचे से सुरक्षित निकल सकें।

​पूरे मार्ग पर फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।

​4. गुणवत्ता और सुधार कार्य

​हाल ही में एक्सप्रेस-वे के कुछ हिस्सों में सड़क उखड़ने की शिकायतें आई थीं, जिन पर NHAI ने त्वरित कार्रवाई की है:

​मरम्मत: खराब हिस्सों को तुरंत ठीक कर लिया गया है।

​आश्वासन: प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी किसी कमी को तुरंत सुधारा जाएगा।

​प्रमुख निष्कर्ष

​यह एक्सप्रेस-वे केवल दिल्ली-देहरादून के बीच का सफर कम नहीं करेगा, बल्कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों को एक नई रफ़्तार देगा। मोहंड एलिवेटेड रोड पर बाइक और स्कूटर को अनुमति मिलने से स्थानीय कामकाजी लोगों को प्रतिदिन घंटों के जाम से मुक्ति मिल गई है।

 

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