किच्छा: सड़क चौड़ीकरण के लिए माँ काली मंदिर का विधिवत स्थानांतरण
ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा-पंतनगर मार्ग पर विकास और आस्था के बीच समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण सामने आया है। सड़क चौड़ीकरण परियोजना में आ रही बाधा को दूर करने के लिए प्रशासन ने 50 साल पुराने माँ काली मंदिर को आपसी सहमति से स्थानांतरित कर दिया है।
किच्छा: सड़क चौड़ीकरण के लिए माँ काली मंदिर का विधिवत स्थानांतरण
किच्छा-पंतनगर मार्ग के विस्तार के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की भूमि पर स्थित मंदिर को हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। प्रशासन ने इसे धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए संपन्न कराया।
1. प्रशासनिक कार्रवाई और सहमति
कारण: हल्द्वानी बाईपास पर स्थित यह मंदिर सड़क विस्तार कार्य में बाधा बन रहा था।
नोटिस प्रक्रिया: प्रशासन ने मंदिर का संचालन कर रहे आनंद अखाड़ा को पूर्व में नोटिस जारी किया था।
सहमति: प्रशासन और अखाड़ा के बीच हुई कई दौर की वार्ताओं के बाद, मूर्ति को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
2. मूर्ति स्थानांतरण और भव्य शोभायात्रा
धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए मूर्ति विदाई को एक उत्सव का रूप दिया गया:
विदाई समारोह: स्थानीय श्रद्धालुओं और अखाड़ा के सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ माँ काली की मूर्ति की विदाई की।
शोभायात्रा: क्षेत्र में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसके माध्यम से प्रतिमा को आनंद अखाड़ा द्वारा संचालित दूसरे मंदिर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया।
3. ढांचा ध्वस्तीकरण और सुरक्षा व्यवस्था
मूर्ति स्थानांतरण के बाद प्रशासन ने निर्माण स्थल को खाली कराने की अंतिम प्रक्रिया पूरी की:
कार्रवाई: रविवार सुबह पुलिस और प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुँची और मंदिर के शेष ढांचे को गिरा दिया गया।
सुरक्षा: किसी भी प्रकार के विरोध या अव्यवस्था को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
4. परियोजना का महत्व
प्रशासन के अनुसार, किच्छा-पंतनगर मार्ग का चौड़ीकरण क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:
यातायात सुगमता: इस मार्ग के चौड़ा होने से किच्छा-पंतनगर के बीच लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी।
आर्थिक विकास: बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
निष्कर्ष: प्रशासन की इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आस्था को भी ठेस नहीं पहुँचने दी गई। आपसी संवाद के जरिए एक जटिल समस्या का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकाला गया।
