उत्तराखंड: दुनिया की सबसे बड़ी फूड कंपनी पर लगा जुर्माना, पिथौरागढ़ में टोंड मिल्क का सैंपल फेल
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनी को भारी पड़ गया है। टोंड दूध का सैंपल फेल होने के करीब 6 साल बाद एडीएम कोर्ट ने कंपनी और दुकानदार पर आर्थिक दंड लगाया है।
उत्तराखंड: दुनिया की सबसे बड़ी फूड कंपनी पर लगा जुर्माना, पिथौरागढ़ में टोंड मिल्क का सैंपल फेल
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) के टोंड मिल्क का सैंपल ‘अधोमानक’ (सब स्टैंडर्ड) पाए जाने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) योगेंद्र सिंह की अदालत ने दो नामी कंपनियों और एक स्थानीय विक्रेता पर कुल 1.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
मामले की मुख्य बातें:
जांच का कारण: टोंड दूध में फैट (वसा) की मात्रा तय मानकों से कम पाई गई।
जुर्माने का विवरण:
निर्माता कंपनी: ₹50,000 का जुर्माना।
विपणनकर्ता (Marketing) कंपनी: ₹50,000 का जुर्माना।
स्थानीय विक्रेता (सामंत जनरल स्टोर): ₹25,000 का जुर्माना।
कैसे हुआ इस लापरवाही का खुलासा?
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के असिस्टेंट कमिश्नर राजेश शर्मा के अनुसार, इस मामले की शुरुआत साल 2019 में हुई थी:
सितंबर 2019: खाद्य सुरक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने थल (पिथौरागढ़) के बिछुल क्षेत्र में दुकानों का निरीक्षण किया। संदेह होने पर एक जनरल स्टोर से मल्टीनेशनल कंपनी के टोंड मिल्क का नमूना लिया गया।
अक्टूबर 2020: रुद्रपुर की राजकीय लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिसमें दूध की गुणवत्ता मानकों से काफी कम (Sub-standard) पाई गई।
कानूनी कार्रवाई: रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया।
घटनाक्रम: 2019 से 2026 तक का सफर
तारीख/ समय विवरण
28 सितंबर 2019: पिथौरागढ़ के थल क्षेत्र से टोंड मिल्क के सैंपल लिए गए।
15 अक्टूबर 2020: लैब रिपोर्ट में दूध के ‘अधोमानक’ होने की पुष्टि हुई।
2021 – 2025: एडीएम न्यायालय (ADM Court) में मामले की सुनवाई चलती रही।
22 अप्रैल 2026: कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कंपनियों और दुकानदार पर जुर्माना लगाया।
प्रशासन का रुख
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितनी भी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी क्यों न हो। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह कठायत ने बताया कि यह फैसला मिलावटखोरी और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों की बिक्री के खिलाफ एक सख्त संदेश है।
नोट: टोंड दूध में फैट की मात्रा कम होना न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि यह पोषण के मानकों पर भी खरा नहीं उतरता। विभाग ने भविष्य में भी इसी तरह के आकस्मिक निरीक्षण और सैंपलिंग जारी रखने की चेतावनी दी है।
