उत्तराखंड

​साइन बोर्ड ढका तो जाना पड़ सकता है जेल: उत्तराखंड में ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ पर SC की समिति सख्त

उत्तराखंड में अब ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ और अपनी खुशी जाहिर करने के बेतरतीब तरीके राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सलाखों के पीछे पहुंचा सकते हैं। सड़क हादसों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की समिति ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

​साइन बोर्ड ढका तो जाना पड़ सकता है जेल: उत्तराखंड में ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ पर SC की समिति सख्त

उत्तराखंड में सड़कों और चौराहों पर लगे ट्रैफिक साइन बोर्ड (यातायात संकेतक) के ऊपर राजनीतिक पोस्टर और बैनर चिपकाने की परंपरा अब भारी पड़ने वाली है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने इस मुद्दे को सड़क हादसों का एक बड़ा कारण मानते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर तत्काल और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

​ट्रैफिक सिग्नल ढकना ‘मोटर व्हीकल एक्ट’ का उल्लंघन

​समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर ने स्पष्ट किया है कि यातायात संकेतकों को ढकना या बाधित करना मोटर व्हीकल एक्ट 1988 का सीधा उल्लंघन है।

​सजा का प्रावधान: नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सड़क सुरक्षा संकेतकों को बाधित करता है, तो उसे 6 महीने तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।

​सुरक्षा का संकट: साइन बोर्ड वाहन चालकों को दिशा-निर्देश देने और खतरों से आगाह करने के लिए होते हैं। इनके ढक जाने से ड्राइवरों को जरूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जो जानलेवा हादसों का सबब बनती है।

​हादसों के आंकड़े डरावने: 112 दिनों में 68 मौतें

​उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा की स्थिति कितनी नाजुक है, इसका अंदाजा इसी साल (1 जनवरी 2026 से अब तक) के आंकड़ों से लगाया जा सकता है:

​उत्तराखंड सड़क हादसा रिपोर्ट (2026):

जिला         मौत       घायल

पिथौरागढ़   15         21

देहरादून      13        60

टिहरी        08         17

नैनीताल    07          29

अन्य जिले  25        107

कुल योग   68         234

नोट: 1 जनवरी 2026 से वर्तमान तक के आंकड़े।

​प्रशासन को ‘जीरो टॉलरेंस’ के निर्देश

​समिति ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में यह सुनिश्चित करें कि कोई भी साइन बोर्ड विज्ञापनों या राजनीतिक पोस्टरों से न ढका हो। समिति ने जोर देकर कहा है कि किसी नेता के प्रति समर्थन जताने का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जो आम जनता की जान जोखिम में डाले।

​पहाड़ी सड़कों पर बढ़ता जोखिम

​विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें पहले से ही चुनौतीपूर्ण हैं। तीखे मोड़ और गहरी खाइयों के बीच साइन बोर्ड ही चालक का एकमात्र मार्गदर्शक होते हैं। ऐसे में राजनीतिक होर्डिंग्स द्वारा दृश्यता (Visibility) को प्रभावित करना आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।

​बड़ी बात:

​”राजनीतिक कार्यकर्ता जिम्मेदारी दिखाएं। खुशियां मनाएं, लेकिन दूसरों की जान दांव पर लगाकर नहीं। प्रशासन अब अवैध पोस्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है।”

​संपादकीय टिप्पणी: यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने की एक कोशिश है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन इन रसूखदार ‘पोस्टरबाजों’ पर कितनी सख्ती से नकेल कसता है।

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