Explainer: दुनिया की ‘रग-ए-जां’ है होर्मुज: क्यों इस संकरे समुद्री रास्ते के बंद होते ही तड़पने लगती है वैश्विक अर्थव्यवस्था?
Explainer: दुनिया की ‘रग-ए-जां’ है होर्मुज: क्यों इस संकरे समुद्री रास्ते के बंद होते ही तड़पने लगती है वैश्विक अर्थव्यवस्था?
आज जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर है, तब एक नाम बार-बार सुर्खियां बटोर रहा है— ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’। यह महज एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वह जीवन रेखा है, जिसके जरा सा रुकने मात्र से दुनिया भर के घरों के चूल्हे से लेकर फैक्टरियों के पहिये तक थम सकते हैं। आइए जानते हैं क्या है होर्मुज की कहानी और क्यों यह पूरी दुनिया के लिए इतना संवेदनशील है।
क्या है होर्मुज और इसकी भौगोलिक स्थिति?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक संकरा जलमार्ग है। इसके एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
लंबाई और चौड़ाई: यह करीब 167 किलोमीटर लंबा है। अपनी सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई महज 33 किलोमीटर है।
नौवहन मार्ग: जहाजों के आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ता और भी संकरा है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, जहाजों के लिए केवल 3 किलोमीटर चौड़ी दो लेन (एक आने और एक जाने के लिए) उपलब्ध हैं।
दुनिया क्यों तड़पने लगती है? (आर्थिक महत्व)
होर्मुज के बंद होने या वहां तनाव बढ़ने का मतलब है वैश्विक ऊर्जा संकट। इसके महत्व को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
तेल का महामार्ग: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% से 25% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना करीब 1.9 से 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल यहां से निकलता है।
एलएनजी (LNG) का केंद्र: कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है, अपना लगभग पूरा गैस निर्यात इसी रास्ते से करता है। इसके बंद होने का मतलब है यूरोप और एशिया में बिजली और हीटिंग का संकट।
एशिया की निर्भरता: भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 60-70% तेल खाड़ी देशों से इसी रास्ते के जरिए मंगाता है।
ईरान का ‘ब्रह्मास्त्र’ है यह रास्ता
ईरान के पास इस जलमार्ग का सबसे लंबा तट है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी अमेरिका ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाता है या सैन्य हमले की धमकी देता है, तो ईरान के पास ‘होर्मुज को बंद करने’ का विकल्प एक परमाणु बम से भी घातक कूटनीतिक हथियार बन जाता है। यदि ईरान यहां सुरंगें (Sea Mines) बिछा दे या मिसाइलें तैनात कर दे, तो वैश्विक तेल की कीमतें रातों-रात 200 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी आना तय है।
इतिहास के पन्ने: जब-जब थम गई सांसें
1980 का दशक (टैंकर वॉर): ईरान-इराक युद्ध के दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों को निशाना बनाया था, जिससे दुनिया भर में हाहाकार मच गया था।
2019-2021 का तनाव: अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से हटने के बाद इस क्षेत्र में कई टैंकरों पर रहस्यमयी हमले हुए और ड्रोन गिराए गए, जिससे युद्ध की स्थिति बन गई थी।
वर्तमान संकट (2026): अमेरिका-ईरान के बीच ‘राउंड 2’ वार्ता के विफल होने की सूरत में ईरान ने फिर से इसे बंद करने की चेतावनी दी है, जिसने शेयर बाजारों और तेल कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
क्या कोई विकल्प है?
सऊदी अरब और यूएई ने होर्मुज को बाईपास करने के लिए पाइपलाइनें बनाई हैं जो लाल सागर या ओमान की खाड़ी तक जाती हैं। लेकिन, ये पाइपलाइनें होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल के मात्र 15-20% हिस्से को ही ढो सकती हैं। यानी, फिलहाल दुनिया के पास होर्मुज का कोई ठोस विकल्प मौजूद नहीं है।
निष्कर्ष: होर्मुज वह ‘बोतल का गला’ (Choke Point) है जिस पर पूरी दुनिया की धड़कनें टिकी हैं। यहां शांति का मतलब है वैश्विक खुशहाली, और यहां एक भी चिंगारी का मतलब है दुनिया भर में महंगाई और तबाही का नया दौर।
आज की बड़ी बात: यदि आगामी इस्लामाबाद वार्ता में होर्मुज की सुरक्षा पर सहमति नहीं बनी, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
