हिंगलाज माता मंदिर उत्सव: पाकिस्तान में उमड़ा आस्था का सैलाब; 3 दिन में 3 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता मंदिर का तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव रविवार को संपन्न हो गया। दुर्गम पहाड़ियों और कठिन रास्तों के बावजूद इस उत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ा, जिसे दक्षिण एशिया में हिंदुओं के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है।
यहाँ इस धार्मिक उत्सव की मुख्य जानकारी दी गई है:
हिंगलाज माता मंदिर उत्सव: पाकिस्तान में उमड़ा आस्था का सैलाब; 3 दिन में 3 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
हिंदुओं का तीसरा सबसे बड़ा आयोजन
बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके में स्थित माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक हिंगलाज माता मंदिर का यह उत्सव 17 अप्रैल को शुरू हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, भारत और नेपाल के प्रमुख धार्मिक मेलों के बाद यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हिंदू आयोजन माना जाता है। तीन दिनों में करीब 3 लाख लोग यहाँ पहुंचे, जबकि साल भर में यहाँ आने वालों की संख्या 10 लाख के पार रहती है।
कठिन पैदल यात्रा और अटूट श्रद्धा
पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर सिंध प्रांत के थारपारकर, उमरकोट और संघार से हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर यहाँ पहुंचे। कई भक्तों को मंदिर तक पहुँचने के लिए 20 दिनों तक का सफर तय करना पड़ा, लेकिन दुर्गम रास्तों के बाद भी उनके उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
श्रद्धालुओं के लिए व्यापक सुविधाएं
उत्सव के दौरान तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे:
प्रशासनिक मदद: बलूचिस्तान सरकार और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ राशन और जरूरी सामान मुहैया कराया।
चिकित्सा शिविर: विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तीर्थयात्रियों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाइयों की व्यवस्था की।
24 घंटे भंडारा: श्री हिंगलाज माता कल्याण मंडली की ओर से चौबीसों घंटे लंगर और पानी की सुविधा दी गई।
बदलती छवि की कोशिश
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इतने बड़े धार्मिक आयोजन का सफल संचालन और उसका प्रचार-प्रसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को सुधारने की पाकिस्तान की एक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। इस दौरान कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने भी मंदिर पहुंचकर मत्था टेका।
हिंगलाज माता की महिमा और इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना भारत-पाकिस्तान के साझा सांस्कृतिक इतिहास की याद दिलाता है। आपकी इस पर क्या राय है?
