उत्तराखंड में पंचायत उपचुनाव की आहट: 3000 खाली पदों पर मई में जारी हो सकती है अधिसूचना; ग्राम प्रधान और वार्ड मेंबर्स का होगा चयन
उत्तराखंड में स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश में पंचायतों के खाली पड़े हजारों पदों को भरने के लिए जल्द ही चुनावी शंखनाद होने वाला है।
उत्तराखंड में पंचायत उपचुनाव की आहट: 3000 खाली पदों पर मई में जारी हो सकती है अधिसूचना; ग्राम प्रधान और वार्ड मेंबर्स का होगा चयन
देहरादून: उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी बढ़ने वाली है। पंचायती राज विभाग ने प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में रिक्त पड़े करीब 3,000 पदों पर उपचुनाव कराने का प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग अगले महीने यानी मई 2026 में इन चुनावों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकता है।
3000 पदों पर होगा घमासान: वार्ड सदस्यों की संख्या सबसे ज्यादा
प्रदेश में लंबे समय से जनप्रतिनिधियों के अभाव में कई पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहा था। इन रिक्त पदों का ब्यौरा कुछ इस प्रकार है:
ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य: सबसे अधिक रिक्तियां वार्ड सदस्यों के पदों पर हैं (लगभग 3,000 के करीब)।
ग्राम प्रधान: दो महत्वपूर्ण ग्राम प्रधानों के पद खाली हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC): एक पद पर उपचुनाव होना प्रस्तावित है।
विभाग और आयोग की तैयारी
पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से रिक्तियों की सूची और आवश्यक विवरण आयोग को उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब गेंद राज्य निर्वाचन आयोग के पाले में है।
वहीं, राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया:
”विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का अध्ययन किया जा रहा है। सरकार को आरक्षण के निर्धारण के संबंध में भी पत्र लिखा गया है। सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद जल्द ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।”
क्यों जरूरी हैं ये उपचुनाव?
पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों का न होना विकास कार्यों की गति को धीमा कर देता है।
योजनाओं का क्रियान्वयन: ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्य सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और स्थानीय समस्याओं के समाधान में मुख्य कड़ी होते हैं।
प्रशासनिक बाधाएं: कोरम पूरा न होने या प्रधान न होने से कई पंचायतों में प्रस्ताव पास करने और फंड के इस्तेमाल में दिक्कतें आ रही थीं।
स्थानीय लोकतंत्र: उपचुनावों से गांवों में जनभागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय शासन को मजबूती मिलेगी।
संभावित समय-सीमा (Timeline)
यदि राज्य निर्वाचन आयोग मई में अधिसूचना जारी करता है, तो जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक मतदान की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। आयोग वर्तमान में मतदाता सूची के सत्यापन और मतदान केंद्रों की तैयारी जैसी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहा है।
निष्कर्ष: इन उपचुनावों से न केवल रिक्त पद भरे जाएंगे, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी। संभावित उम्मीदवारों ने अभी से ही गांवों में अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।
