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नोएडा हिंसा का ‘ब्लूप्रिंट’ आया सामने: 2026 तक अशांति फैलाने की थी साजिश, मास्टरमाइंड आदित्य आनंद गिरफ्तार

नोएडा हिंसा का ‘ब्लूप्रिंट’ आया सामने: 2026 तक अशांति फैलाने की थी साजिश, मास्टरमाइंड आदित्य आनंद गिरफ्तार

​नोएडा: दिल्ली-एनसीआर और नोएडा की हालिया फैक्ट्री हिंसा मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि मजदूरों के आंदोलन की आड़ में भड़की यह हिंसा कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि कई महीनों पहले लिखी गई एक गहरी साजिश का हिस्सा थी। इस पूरे नेटवर्क का केंद्र नोएडा का एक फ्लैट था, जहाँ से दिल्ली और गुरुग्राम तक अशांति फैलाने की स्क्रिप्ट तैयार की गई थी।

​मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और बैकग्राउंड

​पुलिस ने इस साजिश के मुख्य संदिग्ध आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। जांच में जो जानकारियां सामने आई हैं, वे हैरान करने वाली हैं:

​शिक्षा: आदित्य ने हंसराज कॉलेज से पढ़ाई की है और लेबर स्टडी में MA किया है। वह फिलहाल पीएचडी की तैयारी कर रहा था।

​प्रोफाइल: वह खुद को आईटी कंपनी जेनपैक्ट से जुड़ा बताता था। 2022 में कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान ही उसकी सैलरी ₹1 लाख के करीब थी, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि वह हिंसा के लिए आर्थिक मदद भी मुहैया करा रहा था।

​कनेक्शन: साल 2022 के दौरान ही वह कुछ ‘अल्ट्रा लेफ्टिस्ट’ एक्टिविस्ट समूहों के संपर्क में आया था।

​अरुण विहार: साजिश का ‘कंट्रोल रूम’

​आदित्य ने नोएडा के अरुण विहार में एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल के घर में तीन कमरों का फ्लैट किराये पर लिया था। छापेमारी के दौरान यहाँ से जो दस्तावेज मिले हैं, वे इस साजिश की गहराई को बयां करते हैं:

​विस्तृत ब्लूप्रिंट: दस्तावेजों में जिक्र है कि किस फेज में क्या करना है, वॉट्सऐप ग्रुप कब बनाने हैं, एडमिन कब बदलना है और कब ग्रुप से हटना है।

​हिंसा का दायरा: करावल नगर, मानेसर और नोएडा को जोड़ते हुए एक ‘चेन प्रदर्शन’ की योजना थी।

​इन 4 संगठनों के नाम आए सामने

​जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि इस पूरी साजिश के पीछे चार प्रमुख संगठनों और फ्रंट्स का हाथ है, जो मिलकर काम कर रहे थे:

​RWPI (राजनीतिक फ्रंट)

​मजदूर बिगुल दस्ता

​नौजवान भारत सभा

​दिशा ऑर्गनाइजेशन

​मई 2026 तक की थी खौफनाक तैयारी

​पकड़े गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से पता चला है कि इस आंदोलन को मई 2026 तक खींचने का इरादा था।

​मकसद: सिर्फ मजदूरों के मुद्दे उठाना नहीं, बल्कि सड़कों को जाम कर प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह ठप करना था।

​फाइनल स्क्रिप्ट: 31 मार्च और 1 अप्रैल के बीच दिल्ली के आदर्श नगर और शाहबाद डेयरी इलाकों में बैठकें कर इस साजिश को अंतिम रूप दिया गया था।

​जांच के घेरे में फंडिंग और विदेशी लिंक

​नोएडा पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। अब मुख्य सवाल यह है कि इस बड़े नेटवर्क को फंडिंग कहाँ से मिल रही थी? क्या इसके पीछे कोई विदेशी हाथ है? साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि पढ़े-लिखे युवाओं को इस नेटवर्क में भर्ती करने का क्या तरीका था।

​प्रशासन का रुख: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मजदूरों की आड़ में अशांति फैलाने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। छापेमारी जारी है और जल्द ही कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

​क्या आपको लगता है कि मजदूरों के जायज मुद्दों को कुछ तत्व अपने निजी और राजनैतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं?

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