महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी ने राष्ट्र को किया संबोधित, विपक्ष पर साधा निशाना
नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2026: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वें संशोधन) विधेयक के गिर जाने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। यह मोदी सरकार के 12 वर्षों में पहला मौका है जब कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया।
शुक्रवार को हुई वोटिंग में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (कम से कम 352 वोट) नहीं मिल सका, जिससे बिल 54 वोट से गिर गया। सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को भी आगे नहीं बढ़ाया।
इस विधेयक का मकसद लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर लगभग 816 करने का था, ताकि 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) को नए परिसीमन के आधार पर 2029 के आम चुनावों से पहले लागू किया जा सके। विपक्ष ने बिल को दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों में कमी लाने और जाति जनगणना से बचने की कोशिश बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या-क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राष्ट्र संबोधन में विपक्ष पर तीखा हमला बोला और महिलाओं के सपनों को कुचले जाने का जिक्र किया। उनके प्रमुख बयान निम्नलिखित हैं:
नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया: पीएम मोदी ने कहा कि “नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया”। उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि महिलाओं के सपनों और आकांक्षाओं को कुचल दिया गया है। “नारी शक्ति और देश के हित दोनों को नुकसान पहुंचाया गया है। बिल गिरते देख बहुत दुख हुआ।”
विपक्ष ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया: पीएम ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो पार्टियां महिला आरक्षण के खिलाफ खड़ी हुईं, वे महिलाओं की शक्ति को हल्के में ले रही हैं। उन्होंने कांग्रेस को ‘एंटी-रिफॉर्म पार्टी’ (सुधार विरोधी पार्टी) बताया और कहा कि विपक्ष ने अपने स्वार्थ के कारण बिल को पास नहीं होने दिया।
महिलाएं माफ नहीं करेंगी: प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि “जो लोग महिलाओं को आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।” उन्होंने कहा कि हर चुनाव में महिलाओं के अधिकार का विरोध करने वालों की स्थिति और खराब होती गई है।
सरकार की प्रतिबद्धता: पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह सरकार की हार नहीं है, बल्कि महिलाओं के साथ धोखा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रहेगा। “नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कदम है।”
कैबिनेट बैठक में भी सख्त रुख: संबोधन से पहले कैबिनेट बैठक में भी पीएम मोदी ने कहा था कि विपक्ष ने गलती की है और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि वे महिलाओं को जवाब कैसे देंगे।
इस घटना के बाद भाजपा ने विपक्ष के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है और इसे “महिलाओं के साथ धोखा” बताया है। वहीं विपक्ष ने बिल गिरने पर जश्न मनाया और इसे अपनी जीत करार दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 का मूल महिला आरक्षण कानून अभी भी लागू है, लेकिन बिना नए परिसीमन के इसे 2029 से पहले लागू करना मुश्किल होगा। सरकार ने कहा है कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब संसद में सियासी घमासान चरम पर है और आगामी चुनावों में महिलाओं के वोट को लेकर दोनों पक्ष सक्रिय हो गए हैं।
