संसद के बजट सत्र में दोनों सदनों में 309 घंटों से ज्यादा काम, राज्यसभा में 109% से ज्यादा रही प्रोडक्टिविटी
संसद के बजट सत्र में दोनों सदनों में 309 घंटों से ज्यादा काम, राज्यसभा में 109% से ज्यादा रही प्रोडक्टिविटी
नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2026: संसद का बजट सत्र शनिवार को समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, 28 जनवरी 2026 से शुरू हुए इस सत्र के दौरान दोनों सदनों में कुल 309 घंटों से ज्यादा कामकाज हुआ। राज्यसभा में प्रोडक्टिविटी 109 प्रतिशत से ज्यादा रही, जबकि लोकसभा में भी उच्च स्तर की उत्पादकता दर्ज की गई। कई मायनों में यह सत्र बेहद अहम रहा।
लोकसभा स्पीकर का बयान
सत्र के समापन पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इस दौरान लोकसभा में 12 सरकारी विधेयक पुनः स्थापित किए गए और 09 विधेयक पारित किए गए। स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को सुचारू और उत्पादक बनाने के लिए सभी सदस्यों का आभार जताया।
मुख्य उपलब्धियां
कुल कामकाज: दोनों सदनों में 309 घंटे से अधिक समय तक चर्चा, विधायी कार्य और अन्य गतिविधियां चलीं।
राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी: 109% से ज्यादा, जो संसदीय कार्यवाही के लिए बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।
विधेयक: बजट से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक जैसे फाइनेंस बिल 2026 (32 सरकारी संशोधनों के साथ), एप्रोप्रिएशन बिल और अन्य विधेयक पारित हुए। कुछ विधेयकों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिए।
सत्र में वित्तीय मामलों, गैर-विधायी चर्चाओं, प्रश्नकाल और अन्य गतिविधियों को पर्याप्त समय दिया गया।
यह सत्र दो चरणों में चला — पहला चरण जनवरी-फरवरी में और दूसरा चरण मार्च-अप्रैल में। बजट 2026-27 की चर्चा, वित्तीय विधेयकों की मंजूरी और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर बहस हुई।
सत्र की अहमियत
बजट प्रक्रिया पूरी हुई, जिसमें लोकसभा ने फाइनेंस बिल को मंजूरी दी और राज्यसभा ने इसे वापस भेजा।
कुछ संवैधानिक संशोधन विधेयक (जैसे 131वां संशोधन बिल) और अन्य महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए।
उत्पादकता के उच्च स्तर के बावजूद कुछ दिनों में विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित भी हुई, लेकिन कुल मिलाकर सत्र को सफल माना जा रहा है।
लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रश्नकाल, विधायी कार्य, वित्तीय चर्चा और अन्य गतिविधियों ने सदन को व्यस्त रखा। PRS इंडिया और संसद सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार, इस सत्र ने संसदीय लोकतंत्र की कार्यक्षमता को मजबूत किया।
संसद का यह बजट सत्र आर्थिक सुधारों, विधायी प्रक्रिया और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए याद रखा जाएगा। अब मानसून सत्र की तैयारी शुरू हो गई है।
