महिला आरक्षण बिल गिरा: किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर तीखा हमला, कहा “विपक्ष पर लगा ‘महिला विरोधी’ होने का अमिट दाग”
महिला आरक्षण बिल गिरा: किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर तीखा हमला, कहा “विपक्ष पर लगा ‘महिला विरोधी’ होने का अमिट दाग”
नई दिल्ली: महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विफलता के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मानसिकता हमेशा से महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने की रही है।
”दो-तिहाई बहुमत की कमी और विपक्ष का अड़ंगा”
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस ऐतिहासिक सुधार के लिए प्रतिबद्ध थी, लेकिन संवैधानिक बाधाओं के कारण इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
बहुमत का गणित: रिजिजू ने कहा कि सरकार के पास सामान्य बहुमत तो है, जिसके दम पर अन्य सभी विधेयक पारित हो गए, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की कमी और विपक्ष के असहयोग के कारण बिल गिर गया।
बजट सत्र का विस्तार: उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन संशोधन विधेयक को पेश करने के लिए ही बजट सत्र को तीन दिनों तक बढ़ाया था।
कांग्रेस पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि इस घटनाक्रम ने विपक्ष का असली चेहरा उजागर कर दिया है।
अमिट दाग: उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी के ऊपर अब ‘महिला विरोधी’ होने का ऐसा दाग चिपक गया है, जो कभी हटने वाला नहीं है। देश की महिलाएं इस अपमान को नहीं भूलेंगी।”
आक्रोश की चेतावनी: रिजिजू ने चेतावनी दी कि महिलाओं को उनके हक से वंचित रखने के कारण आने वाले समय में कांग्रेस और उसके साथियों को भारी जन-आक्रोश झेलना होगा।
”अधिकार छीनकर जश्न मनाना घोर पाप”
लोकसभा में बिल गिरने के बाद विपक्ष के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा:
”क्या आपने दुनिया में ऐसी कोई पार्टी देखी है, जो महिलाओं को अधिकार न मिलने पर अपनी जीत मानकर जश्न मनाती हो? यह घोर पाप है। महिलाओं को आरक्षण देना हम सबका सामूहिक दायित्व है, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक लाभ की भेंट चढ़ा दिया।”
निष्कर्ष: महिलाओं को हुआ बड़ा नुकसान
रिजिजू ने भावुक होते हुए कहा कि इस बिल के रुकने से व्यक्तिगत रूप से सरकार को नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं को बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने दोहराया कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है, लेकिन विपक्ष की “अधिकार न देने की मानसिकता” ने इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की है।
इस घटनाक्रम के बाद अब महिला आरक्षण का मुद्दा 2026 के राजनीतिक गलियारों में सबसे ऊपर रहने वाला है, जहाँ पक्ष और विपक्ष दोनों ही खुद को महिलाओं का सच्चा हितैषी साबित करने की होड़ में जुट गए हैं।
