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‘एवरेस्ट मैन’ का आखिरी मिशन: अपनी 32वीं चढ़ाई के लिए रवाना हुए कामी रीता शेरपा, 2026 में लेंगे रिटायरमेंट

”एवरेस्ट मैन’ का आखिरी मिशन: अपनी 32वीं चढ़ाई के लिए रवाना हुए कामी रीता शेरपा, 2026 में लेंगे रिटायरमेंट

​काठमांडू: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अपना ‘दूसरा घर’ बना चुके दिग्गज पर्वतारोही कामी रीता शेरपा एक बार फिर इतिहास रचने निकल पड़े हैं। 31 बार एवरेस्ट फतह कर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले 55 वर्षीय कामी रीता अब 32वीं बार शिखर को चूमने के लिए रवाना हो गए हैं। हालांकि, इस बार की चढ़ाई के साथ ही उन्होंने अपने संन्यास का भी संकेत दे दिया है।

​30 साल का सफर और अंतिम चढ़ाई

​हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कामी रीता इस हफ्ते एवरेस्ट क्षेत्र के लिए निकल चुके हैं। वे ’14 पीक्स एक्सपीडिशन’ के तहत एक अंतरराष्ट्रीय टीम का मार्गदर्शन (गाइड) कर रहे हैं। रवानगी से पहले उन्होंने मीडिया से भावुक होते हुए कहा:

​”यह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर मेरी आखिरी कोशिश होगी। मैं अब 55 साल का हो चुका हूँ। साल 2026 में एवरेस्ट से रिटायर होने के बाद मैं ट्रेकिंग और अन्य साहसिक कार्यों से जुड़ा रहूँगा।”

​एवरेस्ट पर अविश्वसनीय रिकॉर्ड

​कामी रीता का सफर साल 1994 में एक युवा पर्वतारोही के रूप में शुरू हुआ था। पिछले 30 वर्षों में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है:

​एवरेस्ट की बादशाहत: उन्होंने अब तक 31 बार एवरेस्ट फतह किया है। उनकी पिछली सफल चढ़ाई 27 मई 2025 को हुई थी।

​8000+ मीटर की चोटियों का रिकॉर्ड: सिर्फ एवरेस्ट ही नहीं, कामी रीता के नाम 8000 मीटर से ऊँची चोटियों पर सबसे ज्यादा (कुल 44 बार) चढ़ने का रिकॉर्ड है।

​अन्य चोटियाँ: उन्होंने चो ओयू (8 बार), मनास्लु (5 बार), और K2 व ल्होत्से पर भी जीत हासिल की है।

​परिवार का दबाव और संन्यास का फैसला

​पर्वतारोहण की दुनिया में ‘अजेय’ माने जाने वाले कामी रीता को उनका परिवार और दोस्त लंबे समय से रुकने की सलाह दे रहे थे। एवरेस्ट की चढ़ाई बेहद जोखिम भरी होती है, लेकिन अपने जुनून के चलते वे हर साल लौटते रहे। अब उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि शरीर और समय को देखते हुए रुकने का वक्त आ गया है।

​मई के मध्य में रचेगा इतिहास

​अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा और मौसम ने साथ दिया, तो मई 2026 के मध्य तक कामी रीता शेरपा 32वीं बार एवरेस्ट की चोटी पर नेपाल का झंडा फहरा देंगे। यह एक ऐसा आंकड़ा होगा, जिसे भविष्य में किसी भी पर्वतारोही के लिए पार करना लगभग नामुमकिन होगा।

​मुख्य बिंदु:

​मिशन: माउंट एवरेस्ट की 32वीं सफल चढ़ाई।

​घोषणा: साल 2026 में पर्वतारोहण से लेंगे आधिकारिक रिटायरमेंट।

​अनुभव: 30 साल का करियर, पहली चढ़ाई 1994 में की थी।

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